| Thursday, 08 August 2013 09:52 |
अजेय कुमार बारह जुलाई, 2007 को जब अमेरिकी हेलिकॉप्टर 'अपाचे' द्वारा बारह निहत्थे नागरिकों, जिसमें रॉयटर के दो पत्रकार भी थे, को मौत के घाट उतारा गया तो रायटर ने सूचना अधिकार के तहत इस वीडियो की मांग की, जिससे पता चल सके कि वास्तव में क्या हुआ था, ताकि भविष्य में वे अपने पत्रकारों की सुरक्षा का इंतजाम ज्यादा पुख्ता कर सकें। विचित्र है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दम भरने वाले देश की सरकार ने रायटर को बताया कि ऐसा कोई वीडियो टेप उसके पास नहीं है। इस अकेले तथ्य से ब्रैडली मानिंग का दिमाग चकरा गया, और उसने इसका खुलासा जज के सामने किया भी। ब्रैडली ने कहा कि हेलिकॉप्टर पर सवार अमेरिकी सैनिकों ने जब उन लोगों को मारा, जो घायलों की मरहम-पट््टी कर रहे थे, तो वे एक-दूसरे को खुशी के मारे बधाई दे रहे थे, मारने की अपनी क्षमता पर इतरा रहे थे। ब्रैडली ने आगे कहा कि वह यह देख कर बहुत ही विचलित हो गया कि एक घायल व्यक्ति जब घिसटते हुए सुरक्षित स्थान पर जा रहा था तो हेलिकॉप्टर में बैठे नौजवान ने उसे चिढ़ाते हुए कहा कि बंदूक उठाओ ताकि मुझे तुम्हें मारने का एक कारण मिल सके। शांत दिखने वाले ब्रैडली को, दुनिया को यह सच दिखलाने के लिए तीस जुलाई को एक सौ तीस साल की सजा सुनाई गई है। जज ने माना कि ब्रैडली का मकसद दुश्मन देशों की मदद करना नहीं था, पर उसने 'गुप्त दस्तावेजों' को विकीलीक्स को देकर राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला है। इस फैसले से एक अन्य युवा स्नोडेन के समर्थकों को यह कहने का मौका मिला है कि 'अच्छा हुआ, स्नोडेन अमेरिका से भाग गया, वरना उसे भी सजा भुगतनी पड़ती।' स्नोडेन ने पहले सीआइए और बाद में राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी में आइटी विशेषज्ञ के रूप में दस वर्ष तक काम किया। उसे ठीक-ठाक वेतन मिलता था और पदोन्नति के काफी अवसर थे। फिर क्या कारण था कि उसने इस आकर्षक नौकरी को त्यागना बेहतर समझा। सात जून को 'गार्डियन' के पत्रकारों को उसने 'प्रिज्म कंप्यूटर प्रोग्राम' का विवरण दिया, जिसके तहत अमेरिका न केवल अपने नागरिकों बल्किदुनिया भर के लोगों की इंटरनेट पर पड़ी सूचनाओं को एकत्र करता है और फिर उनका अपने हित में विश्लेषण करता है। एक सर्वेक्षण के अनुसार उनसठ प्रतिशत अमेरिकी इस प्रिज्म कार्यक्रम के खिलाफ हैं। तैंतालीस प्रतिशत मानते हैं कि स्नोडेन ने बहादुराना काम किया है और उस पर मुकदमा नहीं चलाना चाहिए। इकतालीस प्रतिशत लोगों का मत है कि स्नोडेन ने सार्वजनिक हित की खातिर अपनी नौकरी कुर्बान कर दी। गार्डियन के पत्रकारों को सूचनाएं देने के फौरन बाद स्नोडेन ने अमेरिका छोड़ दिया और वह हांगकांग चला गया। वहां गार्डियन के पाठकों के साथ दो घंटे का सवाल-जवाब कार्यक्रम किया। जब पूछा गया कि आप अमेरिका से क्यों भागे तो उसका जवाब था, ''अमेरिकी सरकार ने जैसा अन्य 'विसलब्लोअरोंं' के साथ किया, उससे न्यायसंगत मुकदमे की उम्मीद नहीं है। उसने मुझे खुलेआम एक देशद्रोही कहा है। जबकि मैंने गुप्त, आपराधिक और गैर-संवैधानिक क्रियाकलापों को उजागर किया। यह न्याय नहीं है और अपने आपको उनके हवाले कर देना मूर्खता होगी। अगर आप जेल से बाहर अंदर की अपेक्षा बेहतर काम कर सकते हैं... मुझे उस डिक चेनी ने देशद्रोही कहा है जिसकी वजह से चौवालीस सौ अमेरिकी अपनी जान गंवा चुके हैं और बत्तीस हजार अमेरिकी अपाहिज हो चुके हैं और एक लाख इराकियों को मौत के घाट उतारा जा चुका है।'' रूस ने स्नोडेन को राजनीतिक शरण दे दी है। रूस में आम जनता स्नोडेन के साथ है। विभिन्न देशों की सरकारें अमेरिका से पूछ रही हैं कि यह क्या माजरा है, कहां तक उनके मंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति सुरक्षित हैं। लातिन अमेरिकी सरकारें खुलेआम प्रिज्म कार्यक्रम पर अपना विरोध प्रकट कर रही हैं। कोलंबिया के अमेरिका के साथ अच्छे संबंध हैं, पर उसने भी अमेरिकी प्रशासन से जवाब तलब किया है। ब्रैडली मानिंग हो या स्नोडेन, ऐसे युवा सच्चे स्वतंत्रता-सेनानी हैं। अगर वे देश-द्रोही होते तो गुप्त दस्तावेजों को लाखों डॉलरों में बेच कर फरार हो सकते थे। पर उन्होंने ऐसा नहीं किया। इंटरनेट हमारे भविष्य की कुंजी है। इस पर दुनिया के साधारण जनों का कब्जा हो, इसके लिए जनांदोलन की जरूरत है। स्नोडेन ने तो केवल सीटी बजाई है। इंटरनेट को अमेरिकी कब्जे से मुक्त कराने का मुद््दा भविष्य में जोर पकड़ेगा, ऐसी उम्मीद की जा सकती है।
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Thursday, August 8, 2013
सच कहने की सजा
सच कहने की सजा
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