| Monday, 08 July 2013 14:28 |
श्रीनगर। विवादास्पद सशस्त्र बल विशेष अधिकार कानून (एएफएसपीए) को लेकर जारी गतिरोध से अलग हट कर समाधान निकालने की कोशिश में आज जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अशांत क्षेत्रों में अभियान के लिए सशस्त्र बलों को छूट देने वाले इस कानून में बदलाव करने का सुझाव दिया। उमर ने राज्य सरकार द्वारा जन सुरक्षा कानून में बदलाव किए जाने का उदाहरण दिया। इस कानून के तहत किसी भी व्यक्ति को बिना सुनवाई के दो साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। यह पूछे जाने पर कि क्या चुनाव से पहले उमर की कोई 'विश लिस्ट' है, मुख्यमंत्री ने एएफएसपीए को उन मुद्दों में से एक बताया जिन पर वह चाहते हैं कि केंद्र फैसला करे। उन्होंने कहा 'हां, मैं चाहूंगा कि एएफएसपीए पर हमारा विचारविमर्श आगे बढ़े।' उन्होंने कहा 'मैं उन बाध्यताओं को समझता हूं जिनके तहत सेना अभियान चला रही है। बेमिना में जो हुआ, उससे मेरे विचार से यह जाहिर होता है कि सेना को अभियान चलाने के लिए कानूनी आवरण की जरूरत है।' मुख्यमंत्री ने कहा 'मुझे उम्मीद है कि अभियान के लिए कानूनी आवरण और इस कानून के तहत मिली छूट के बीच हम बीच का एक आधार खोज सकेंगे। छूट की वजह से बांदीपोरा जैसी घटनाएं हुई हैं।' उन्होंने वर्ष 2010 में माचिल में हुई कथित फर्जी मुठभेड़ जैसी विवादित घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'हमें ऐसी घटनाओं से बचने की जरूरत है। मैं समझता हूं कि सेना के अभियान चलाने के लिए कानूनी आवरण जरूरी है और हम इसे बनाए रखेंगे। यही है जिसे हम आगे ले जाना चाहते हैं।'' |
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