BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Welcome

Website counter
website hit counter
website hit counters

Monday, June 17, 2013

पांच मिनट के कामदुनि सफर में दीदी ने आपा खोया!बलात्कारियों को सीपीएम बता दिया, प्रदर्शनाकारियों को भी!

पांच मिनट के कामदुनि सफर में दीदी ने आपा खोया!बलात्कारियों को सीपीएम बता दिया, प्रदर्शनाकारियों को भी!


दीदी के मिजाज शायद राज्य चुनाव आयोग के इस बयान से भी बिगड़ा कि पर्याप्त वाहिनी न मिलने पर पंचायत वोट नहीं होगा।


एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​


पांच मिनट के कामदुनि सफर में दीदी ने आपा खोया!बलात्कारियों को सीपीएम बता दिया, प्रदर्शनाकारियों को भी!दीदी के मिजाज शायद राज्य चुनाव आयोग के इस बयान से भी बिगड़ा कि पर्याप्त वाहिनी न मिलने पर पंचायत वोट नहीं होगा।तृणमूल कांग्रेस के सात हजार सीटें जीत लेने के बाद ग्राम बांग्ला में विपक्ष का सफाया तय हो जाने के बाद आयोग के इस वक्तव्य पर दीदी की मिजाज गर्म हो जाना गलत भी नहीं कहा जा सकता।हालांकि दीदी के लिए यह कोई नयी बात नहीं है।पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सोमवार को ग्रामीणों के जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा!दरअसल ये घटना उस समय हुई, जब ममता बनर्जी सड़क बेहद जर्जर होने के कारण बाइक में लिफ्ट लेकर 24 परगना के बारासात में एक गैंगरेप के बाद हुई हत्या के मामले में पीड़ित परिवार से मिलने कामदुनि पहुंची।ममता बनर्जी ने  परिजनों को नौकरी का ऑफर भी दिया, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया!जब वह अपनी कार में सवार होने वाली थी तभी सैकड़ों गांववासी विरोध जताते हुए मुख्यमंत्री के करीब पहुंच गए।जिन्होंने उनसे कुछ सवाल किए। एक महिला के कड़ा विरोध जताने पर मुख्यमंत्री उसके साथ उलझ गयीं। मुख्यमंत्री ने महिला को माकपा कर्मी करार दिया और कहा कि माकपा को इस तरह की घटिया राजनीति करते हुए शर्म नहीं आती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में जिन लोगों को पकड़ा गया है वे लंबे समय तक माकपा के साथ रहे हैं। विरोध जताने वाली महिलाओं को खरी-खोटी सुनाने के बाद मुख्यमंत्री अपनी कार में बैठ गयीं।मुख्यमंत्री ने कहा कि मृतका के परिजनों के साथ मुलाकात में क्या बात हुई वह इस बारे में ब्यौरा नहीं देंगी. हालांकि, इलाके में चार नये पुलिस थाने खोले जाएंगे।उन्होंने जाहिरा तौर पर पूर्व वाम मोर्चा सरकार की ओर इशारा करते हुए कहा कि उन्हें और अधिक पुलिस थानों की योजना बनानी चाहिए थी!

 

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मृत छात्रा के परिजनों से पांच मिनट बातचीत की।इस दौरान उनके साथ पूर्व रेलमंत्री मुकुल रॉय भी थे।  मृतका के वृद्ध मां-बाप से मिली व उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेने के बाद चिकित्सा की व्यवस्था करने का निर्देश दिया।घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति व सुरक्षा कारणों से मुख्यमंत्री का बारासात दौरा गोपनीय रखा गया था। इसके बावजूद मुख्यमंत्री को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। घटना के 10 दिन बाद मुख्यमंत्री के पहुंचने पर ग्रामीणों ने विरोध जताया। इससे पहले कालीघाट में उनके निवास पर इस कांड के खिलाफ महिला संगठनों की ओर से प्रदर्शन हो चुका है।



माकपा ने ममता बनर्जी के आरोपों पर आक्रोशित प्रतिक्रिया में उन पर ''दुर्भाग्यपूर्ण और बेहद निंदनीय'' घटना में शामिल दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय आरोप प्रत्यारोप के खेल में शामिल होने का आरोप लगाया।

  

माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा, ''सरकार माकपा या अन्य लोगों पर आरोप लगाकर बच नहीं सकती. यह पूरी तरह हास्यास्पद है। उसे प्रशासन चलाना चाहिए। पश्चिम बंगाल में जो कुछ हो रहा है वह तेजी से होता पतन और कानून व्यवस्था का गड़बड़ाना है।''



अपना संयम खो चुकी ममता ने ग्रामीणों को जवाब दिया, ''क्या आपको इस तरह की घटना पर राजनीति करते शर्म नहीं आती? आप माकपा की राजनीति कर रहे हैं. गिरफ्तार किए गए लोग माकपा से जुड़े हुए हैं!''


ममता ने कहा, 'मैं परिवार से मिलने जा रही थी। जो कुछ हुआ वह वास्तव में दुखद और डरावना है। हमने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का वादा किया है। हम सात आठ दिन में आरोपपत्र दाखिल कर देंगे और एक महीने के भीतर दोषियों को सजा दी जाएगी। हम सरकार की ओर से मौत की सजा की मांग करेंगे।'


अपराध ब्यूरो की रपट में महिलाओं पर अत्याचारों के मामले बगाल को अव्वल स्थान हासिल करने के बाद राज्य की कानून मंत्री चंद्रिमा भदुड़ी ने दावा किया है कि बगाल में महिलाएं देशभर में सुरक्षित हैं। लेकिन विरोद का सिलसिला जारी रहा और बलात्कार का सिलसिला भी। सिविल सोसाइटी के ज्यादातर चेहरे दलबद्ध हैं तो कुछ लोग कामदुनि पहुंच भी गये। इसके साथ ही युवा वर्ग की ओर से धरना विरोध प्रदर्शन का तांता लग गया। इसलिए पूरी गोपनीयता क सात दीदी पंचायत चुनाव के मद्देनजर हालात पर काबू पाने के मकसद से कामदुनि पहुंच गयी। वहां टुम्पा नामकी महिला ने मुख्यमंत्री से बात करनी चाही तो दीदी का मिजाज बिगड़ गया और तुरंत बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार सभी लोगों को माकपाई बता दिया। कामदुनि प्रसंग में विरोध प्रदर्शन के उन्होंने सीधे विपक्ष की राजनीति बता दिया। जबकि बारासात का यह इलाका तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ है।जबकि हकीकत यह है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब सिर्फ दीदी नहीं रहीं।दार्जिलिंग में रहने वाले लेप्चा समुदाय के डेढ़ लाख लोग उन्हें समृद्धि की देवी मानते हैं। लेप्चाओं के लिए मुख्यमंत्री द्वारा अलग बोर्ड गठन की दूसरी सालगिरह के अवसर पर आगामी दो सितंबर को प्रस्तावित समारोह में उन्हें यह उपाधि दी जाएगी। लेप्चा आदिवासी संघ ने यह घोषणा की है।कालीघाट में उनका निवास है और बारासात कांड के सिलिसिले में उनके गुस्से की देवी की नाराजगी समझा जा सकता है।लगता है कि बगाल में तेजी से उनकी दैवी सत्ता का विरोध तेज होने लगा है और देवी के क्रोध का कारण भी यही है।


लेप्चा आदिवासी संघ  के अध्यक्ष एलएस तामसंग ने बताया कि लेप्चा उन्हें इसलिए देवी मानते हैं, क्योंकि ममता ने समुदाय की मांग पर उनके विकास के लिए 2 सितंबर, 2011 को अलग बोर्ड का गठन किया था। आगामी दो सितंबर को बोर्ड गठन की दूसरी सालगिरह पर लेप्चा समुदाय के लोग ममता को 'किंगटसूम दारमित' की उपाधि देंगे। लेप्चा बोली में इसका मतलब 'समृद्धि की देवी' होता है।सिलीगुड़ी में होने वाले इस समारोह में 50,000 लेप्चा मौजूद रहेंगे। लेप्चा दार्जिलिंग के मूल निवासी माने जाते हैं, परंतु गोरखा समुदाय की चर्चाओं के चलते इस समुदाय का नाम भी सुनने में नहीं आता। गौरतलब है कि मई, 2011 के चुनाव में वाम मोर्चा के खिलाफ मिली जीत के बाद प्रख्यात पेंटर एमएफ हुसैन ने उन्हे देवी दुर्गा के रूप में चित्रित किया था।


पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को फिर आपा खो दिया। ममता बाइक पर सवार होकर बारासात में बलात्कार की शिकार हुई लड़की के परिवार वालों से मिलने पहुंचीं। वहां उन्होंने आरोप लगाया कि लड़की के साथ सीपीएम कार्यकर्ताओं ने बलात्कार किया है। लेफ्ट पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने ममता का विरोध किया तो ममता ने एक कार्यकर्ता को थप्पड़ मार दिया।मृतक छात्रा के परिजन से मुलाकात के बाद ममता ने कहा, 'जो कुछ हुआ वह बहुत दुखद है। हम दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का वादा करते हैं और दोषियों को एक महीने के अंदर सजा मिलेगी। हम सरकार की ओर से मौत की सजा का अनुरोध करेंगे।'


ममता ने दावा करते हुए कहा, 'भारत में हमारी ही सरकार एकमात्र ऐसी सरकार है जिसने उत्तर बंगाल के बालुरघाट में दोषियों को 27 दिनों के अंदर सजा दिलवाई। कार्रवाई करने में हम नंबर एक हैं।' उन्हें ग्रामीणों के जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा जिन्होंने उनसे कुछ सवाल किए।


अपना संयम खोते हुए ममता ने जवाब दिया, 'क्या आपको इस तरह की घटना पर राजनीति करते शर्म नहीं आती? आप माकपा की राजनीति कर रहे हैं. गिरफ्तार किए गए लोग सीपीएम से जुड़े हुए हैं।' उन्होंने जाहिरा तौर पर पूर्व वाम मोर्चा सरकार की ओर इशारा करते हुए कहा कि उन्हें और अधिक पुलिस थानों की योजना बनानी चाहिए थी।.


कॉलेज छात्रा से बलात्कार और उसकी हत्या की घटना की नृशंसता पर ना केवल समूचे प्रदेश में प्रदर्शन हुए बल्कि राज्य मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच भी शुरू की।


इससे पहले, राज्य के खाद्य मंत्री ज्योतिप्रियो मलिक और तृणमूल कांग्रेस सांसद नुरूल इस्लाम को भी उस वक्त गुस्से का सामना करना पड़ा था जब उन्होंने मृतका के परिवार के सदस्यों को मुआवजा देने की कोशिश की थी।


गांव से लौटते समय संवाददाताओं से बातचीत में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने  कहा कि वह इस तरह की घटना घटने पर इलाकों की स्थिति जानने के लिए आयी हैं। यह पिछड़ा गांव है। संचार व्यवस्था नहीं है। राजारहाट शहर बसाने के लिए जब जबरन जमीन ली गयी तो इस तरह के गांवों को उपेक्षित छोड़ दिया गया। माकपा का पाप उन्हें ढोना पड़ रहा है। कर्ज का बोझ इतना है कि उनके पास जरूरी काम करने के लिए पैसा नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने चार पुलिस कमीश्नरेट बनाया और कई हजार पुलिस कर्मियों की नियुक्ति की। सुश्री बनर्जी ने कहा कि बारासात में एक थाने को विभाजित कर चार नए थाने बनाए जाएंगे। जिले की सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए अतिरिक्त डीजी (सीमा) संजय चंद्रा की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके पहले भी यहां मां बहनों पर इस तरह के अत्याचार होते रहे हैं लेकिन पहले एफआइआर तक दर्ज नहीं होता था। उनके सत्ता संभालने के बाद अब लोग एफआइआर करने का साहस दिखा रहे हैं। महिलाओं में भी इस तरह के मामले में एफआइआर दर्ज कराने को लेकर जागरुकता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि जो इस तरह का काम करता है वह समाज का दुश्मन है। इस तरह के मामले में संकीर्ण राजनीति से ऊपर उठकर सभी को मां-बहन की हिफाजत के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि 7-8 दिनों के अंदर चार्जशीट दायर कर दी जाएगी और एक माह के अंतर दोषियों को सजा होगी। सरकार अदालत से इस मामले में दाषियों को फांसी की सजा सुनाने का अनुरोध करेगी। महिलाओं पर अत्याचार का मामला जल्द निपटारा करने के लिए सरकार ने 45 महिला अदालत की व्यवस्था की है। महिला पुलिस कर्मियों की संख्या बढ़ायी जाएगी।




No comments:

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...