BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Welcome

Website counter
website hit counter
website hit counters

Thursday, May 9, 2013

ट्रेड लाइसेंस को लेकर गिरोहबंदी!

ट्रेड लाइसेंस को लेकर गिरोहबंदी!


एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​


राज्यभर में नगरनिगम और नगरपालिकाओं के दफ्तरों में कर्मचारियों और दलालों की गिरोहबंदी का आलम यह है कि नकद भुगतान पर किसी को भी बिना जांच पड़ताल ट्रेड लाइसेंस जारी कर दिया जाता है। राज्यभर में चिटफंड कंपनियों की बहार के पीछे यह गिरोहबंदी बहुत काम कर रही है। लेकिन आम नागरिकों के लिए जिनके पास ऐसे गिरोह को उनकी मांग के मुताबिक भुगतान के लिए पर्याप्त पैसे नहीं होते, दर दर पापड़ बेलने पड़ते हैं अपना अपना कारोबार शुरु करने के लिए।


यह किस्सा हावड़ा हो या कोलकाता, मालदह हो या सिलिगुड़ी, आसनसोल हो या दुर्गापुर या कोई जिलाशहर, सर्वत्र आम है। राज्यभर में लोग अपना कारोबार शुरु करने के लिए इस अपराध गिरोह के मोहताज हैं, जिन्हें मजबूत राजनीतिक संरक्षण मिला होता है।


म्युटेशन के मामले जो झमेला है, उससे कई गुणा ज्यादा मुश्किल काम है जेनुइन लोगों के लिए ट्रेड लाइसेंस निकालना। फर्जी लोगों के लिए कोई मुश्किल नहीं है।


आप कायदा कानून के मुताबिक कुछ लिये दिये बिना लाइसेंस हासिल करने की उम्मीद से हैं तो लगाते रहिये लाइसेंस बाबू के दफ्तर में चक्कर। वे आपको चरखी तरह नचाकर दम लेंगे। पर आपकी मुश्किल आसान नहीं होगी। लेकिन जहां आप दादा गिरोह की शरण में चले गये, तो जेबें हल्की करा लेते ही आपके हातों में होगा ट्रेड लाइसेंस।


दादाओं की मेहरबानी अपरंपार है। अगर उनकी पूजा सही तरीके से हो गयी तो कोई जरुरी नहीं कि आपको लाइसेंस नगर निगम या पालिका दफ्तर जाकर लेना पड़े। लाइसेंस चलकर आपके ठिकाने तक पहुंच जायेगा। दादाओं के अपने अपने दफ्तर बी है जो खूब चलते हैं।आप ​​लाइसेंस बाबू को दर्शन दिये बिना वहां से भी लाइसेंस हासिल कर सकते हैं।


ऐसा भी नहीं है कि संबंधित निकाय के मेयर या पालिकाअध्यक्ष या विपक्ष को इस गोरखधंधे के बारे में कुछ मालूम नहीं है। पर इस गिरोहबंदी के आगे उनकी राजनीतिक ताकत छोटी पड़ जाती है अक्सरहां। अमूमन बहती गंगा में हाथ दो लेने वाले भी कम नहीं होते। उनकी ओर उंगली उठा ली तो गये आप काम से !


राजनीतिक लोगों से पंगा लेकर किसकी छाती में इतना दम है कि कारोबार शुरु भी कर लें तो बिना हुज्जत के चला लें। फिर किस दीवाने को हुज्जत लने का शौक होगा?


इस गिरोहबंदी की असली ताकत यह है कि कारोबारी जमात ज्यादा झमेले में नहीं पड़ता। ज्यादातर किस्से ले देकर मामला बना लेने के हैं।बाकी लोग भी देखादेखी मुश्किल आसान करने में ही अपना हित देखते हैं।


फाइलें इन दादाओं की मर्जी से उड़ती हैं या ठहर जाती हैं। अफसरों को तो घोड़ा बेचकर सोने की आदत है। उनको तो पता ही नहीं चलता कि उनके महकमे में उनके नाम से कैसा कैसा धंधा चलता है। मालूम हुआ , फिर भी वे सोते रहते हों, तो इसे क्या कहा जाये?


No comments:

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...