BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

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Friday, May 31, 2013

उत्तराखंड कु विकास से अक्षर ज्ञान




गढ़वाली हास्य -व्यंग्य 
 सौज सौज मा मजाक मसखरी 
   हौंस,चबोड़,चखन्यौ    
    सौज सौज मा गंभीर चर्चा ,छ्वीं  

                                     उत्तराखंड कु  विकास से अक्षर ज्ञान

                          चबोड़्या - चखन्यौर्याभीष्म कुकरेती
(s = आधी  )

क - कैको विकास ? क्यांको, कैकुण विकास? कखौ विकास?
ख पैल लखनऊ मा अर अब देहरादून माँ खूब खड़कु -दड़कु /खड़को -दड़को हौर जगा खारु-खरपट
ग-गुदखैऋ (इर्ष्या ) को विकास
घ- ग्यूं बि खत्याणा छन अर घाघरो बि उठ्युं च।
च -चकडैत चोर चकचुन्दरों जन जनता तैं चौतरफी चकच्यौणा त छैं छन
छ -भौतुन छंछोळ (भेद लेना ) पण यु विकास कना हरच धौं!
ज- इलाहाबाद बिटेन जंक जोड़ से विकास तैं जनक्याणो बुलायाँ त छन!
झ- देखिक त लगणु च क्वी झझकू (प्रेतवाधा ) लगी गे। दिल्लि बिटेन झाड़ ताड़ वाळ बुलायुं त छें च धौं!
ट -टंगट्यपाळि (चालु काम ) तैं सैत विकास बुलदन तबि त स्यु विकास टुटगाँ /टोटकु पड्यु च।
ठ -ठग्गू न ठग अर जनता मा ठमसाट (असंतोष ). ठिका अर ठेकेदारी विकासोनुमुख च।
ड -डोखरौं (खेत ) मा सट्यूं जगा मळसु  (घास) फुळणु च। धरम करम कि डंडलि सजीं च। डाम  डामणा छन।
ढ -ढंट ढंटणा छन। नेता लोग ढंड करंदेर ह्वे गेन।
त -लोग तरसणा छन अर अधिकारि तस्मैं  (खीर ) घटकणा छन।
थ - विकास का अस्वासन अब थंवार (दिलासा ) नि दींदन उल्टां थिनकै(रुलाना) दींदन।
द - विकास माने द्वाळेण (अटकना ,उलझना ,  विलम्ब  होना )
ध -ध्वकादारि मा छौसठ साल बीति गेन अगनै बि बीति जाला।
न -विकासौ नक्क -छक्क छ क्या च ?
प - परथारि (उधार ) की तकनीक से बि विकास हूंद?
फ -फ्युंद्यानाथुं क मकान देखिक त लगणु च कुछ त ह्वाइ च।
ब- बांज पुंगड़ देखिक समजि ल्यावो क्या ह्वे ह्वालो
भ - भत्याभंग त ह्वाइ छैं च
म - घुतडु  बुबा जीक मन्यौडर अब नि आंदन . इंटरनेट से पैसा ट्रांसफर ह्वे जांदन।
य -यख क्या च शहर जौंला
र -अधिकारी अर नेता हम तैं रिंगांणा रौंदन।
ल - ब्यलो  पावर्टी लाइन का कार्ड  लीण वाळु  लंगत्यार तो द्याखो।
व- विकास अब विकोड़णु  (उपहास के लिए मुंह विचकाना) रौंद   .
स - अब हम वकास का सस्यौणम (लालच ) मा नि आंदा।
ह -हथजुडै च कि अब विकास कि छ्वीं नि लगैयाँ। भौत सुणि याल भौत देखि आल।  



  
 
          

Copyright @ Bhishma Kukreti  31/05/2013           
(लेख सर्वथा काल्पनिक  है )


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Regards
Bhishma  Kukreti

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