BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

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Wednesday, May 8, 2013

बस भी करो विश्लेशको

बस भी करो विश्लेशको


जगमोहन फुटेला


 

हम सभी लिखने वालों को ये लिखने की आदत है इस चुनाव परिणाम से बाकी देश में भी असर पड़ेगा. बल्कि कुछ स्ट्रिंगरों को तो मैंने उत्तर भारत में किसी एक नगर निगम के चुनाव परिणाम का असर भी देश पे होगा बताते देखा है.

 

कोई पूछे ऐसे विशेषज्ञों से कि भाई चंडीगढ़ के मतदाताओं को मतलब रेलवे घूस कांड में लिप्त अपने सांसद के आचरण से होगा या किसी येदुरप्पा से? बंगाल में ममता और वाम को दोनों को पछाड़ कर क्या कांग्रेस का परचम लहराने वाला है? बंगाल की बात करें तो वहां कर्नाटक वाली भाजपा कहां है और कांग्रेस कहां? दिल्ली महानगर के सभी निकायों पर पहले भाजपा ने कब्ज़ा किया और फिर गुरुद्वारा चुनावों में उस के सहयोगी अकाली दल ने धूल चटा दी सरना गुट को, तो क्या वहां कांग्रेस की वापसी हो जाने वाली है अन्ना, केजरीवाल, सिखों के प्रदर्शनों और गुड़िया, दामिनी प्रकरणों के बावजूद? कर्नाटक का परिणाम सज्जन कुमार कांड के बाद से फिर कांग्रेस को छोड़ चले सिखों को सब कुछ भूल कर क्या कांग्रेस की तरफ वापिस ले आने वाला है? पंजाब में लगातार दूसरी बार विधानसभा चुनाव हारी और बुरी तरह से हतोत्साहित और विभाजित कांग्रेस क्या पंजाब में कर्नाटक कीर्तन कर के जीत जाने वाली है? अश्विनी कुमार को रखने, निकालने का भी कोई असर अब नहीं होगा पंजाब में? क्या मान लें कि यूपी में अब मुलायम को तो जाना ही है और माया को भी कभी अब आना नहीं है?

 

हे कूप मंडूको, तुम्हारी मानें तो जिस उड़ीसा में कांग्रेस और भाजपा दोनों का कोई नामलेवा नहीं है उस में नवीन पटनायक का सूपड़ा अब साफ़ होने ही वाला है. उत्तराखंड में कांग्रेसियों की जूतम पैजार और कोका कोला को ज़मीन और पानी देने पे मचा बवाल बेमानी है. हरियाणा में डीएलएफ के पैसों से उसी की संपत्तियां खरीद कर रातों रात करोड़ोंपति हो जाने वाले वाड्रा और अगली तारीख से भी पहले अगला तबादला आ जाने वाले अशोक खेमका अब कोई मुद्दा नहीं रहे. आप की मानें तो बिहार में भाजपा, जद(यू), लालू सब बेकार. बिहार से सांसद तो अब कर्नाटक के नेता जिता के लाएंगे. गुजरात में नरेंद्र मोदी मिट्टी हो जाएंगे. हालत ये कर देगी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस कि मोदी प्रधानमंत्री क्या, हार की शर्म के मारे गुजरात में मुख्यमंत्री भी नहीं रह पाएंगे.

 

कुछ तो शर्म करो यार. फेसबुक ने कुछ भी लिखने की सुविधा दी है तो कुछ भी लिखे चले जाओगे? अपनी पी आर एजेंसी कहीं और चला लो भाई. पी आर और लेखन, विश्लेषण में वैसे भी कुछ फर्क होना ही चाहिए. कोई ज़रूरी तो ये भी नहीं है कि टाइप करना आता है तो लिखते ही चले जाओ. उस पे भी जिस का अता नहीं पता, पता भी नहीं मालूम.

 

हो सकता है आप पलट के मुझे भाजपा के पे-रोल पे बताओ. हिंदू तो मैं हूं ही. संघी भी कह सकते हो. लेकिन इस जोखिम पे भी ये तो मैं बता के रहूंगा कि इस देश के लोग न चैनलों के ओपिनियन सर्वेक्षणों को देख के वोट देते हैं, न मुझ आप जैसे कलमघसीटों को पढ़ के. आप नहीं लिखोगे तब भी पता है पब्लिक को कर्नाटक में भाजपा को जाना ही था. उस ने जब पार्टी पे भ्रष्ट येदुरप्पा के नाम का लगा ठप्पा उतार फेंकने का फैसला किया तो तभी तय हो गया था कि बेईमानों की पूरी जमात अपनी जात के लोगों समेत कांग्रेस का खेल खेलेगी. राजनीति और धंधे का एक उसूल ये भी है कि इधर से अगर जाता है तो  उधर से जो आता है वो भी अधिकार समझ के ले लेना चाहिए. मगर भाई, कीमत अगर किसी येदुरप्पा ने वसूल की है तो ईमान सारे बंगालियों, पंजाबियों और जाटों या गुजरातियों का कैसे बिक सकता है? मुसलमान मुलायम, दलित माया, जाट चौटाला, बंगाली ममता या कामरेडों, सज्जन कुमार के फैसले के बाद से फिर आहत सिख अकालियों और अभी हाल ही दिल्ली और यूपी के भी महानगरों में विजय दिलाने वाले शहरी मतदाता भाजपा को क्यों छोड़ देंगे? कार्ड खेलना और चलना अगर फिर हिंदुत्व का है तो फिर देश का हिंदू कांग्रेस के साथ क्यों चला जाने वाला है? बताओ न !

 

ये सार्वभौम सत्य है कि ग्राम पंचायत के चुनाव परिणामों की वजह अलग होती है, विधानसभा चुनावों की अलग और लोकसभा की बिलकुल अलग. न मानों तो आप इब्राहीम दाउद को उस की पसंद के किसी गांव से चुनाव लड़ने की इजाज़त दे के देख लो. शर्तिया जीतेगा वो 95 फीसद से ज़्यादा वोट ले के. लेकिन लोकसभा में 5 फीसदी वोट भी वो नहीं ले पाएगा कहीं से. जीत जाना एक अलग बात है, लेकिन किसी पप्पू यादव को प्रधानमंत्री कौन बनाएगा?

 

इस लिए किसी ग़लतफ़हमी मत रहो मित्रो. शाम को कहीं घंटे दो घंटे की भेंट, मुलाक़ात का जुगाड़ होता हो टीवी पे कुछ बोल लेने या फेसबुक पर लिख देने भर से तो कर लो. गला तर कर आओ बेशक. लेकिन इस ग़लतफ़हमी में मत रहना कि आप को राजनीति का ज्ञान है और कि कर्नाटक पंजाब, बंगाल, यूपी, बिहार या गुजरात हो जाने वाला है.  जुलूस अपनी अक्ल और ईमान का फिर भी निकालना है तो रोक आप को कौन सकता है?

 

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