BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

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Tuesday, May 7, 2013

पूरे त्रिपुरा में छापेमारी और जब्ती की कार्रवाई जारी रहेगी!

पूरे त्रिपुरा में छापेमारी और जब्ती की कार्रवाई जारी रहेगी!


एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​


देश के पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में मौसमी तूफान का कहर जारी है। रविवार की रात से हो रही तेज बारिश और आंधी के चलते राज्य में एक मजदूर की मौत हो गई है, जबकि चार अन्य लोग घायल हो गए। तूफान तो निपट गया लेकिन चिटफंड कंपनियों के चलते जो तूपान जारी है, उसके जल्दी थमने के लक्षण नहीं दिखायी देते।लेकिन माणिक सरकार की हालत दीदी से बेहतचर बतायी जा सकती है क्योंकि उनके सामने दीदी का जैसा प्रबल प्रतिपक्ष नहीं है। जनरोष भड़कने से पहले ही सरकार एहतियाती कार्रवाई करने लगी है और इस बीच मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे चिटफंड कंपनियों के खिलाफ कठोर कदम उठाएं।  माकपा के राज्य महासचिव बिजन धर ने रविवार को पार्टी की एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा, "केंद्र सरकार ग्रामीण इलाकों में बैंक की शाखाएं नहीं खोल रही है। छोटी बचतों पर ब्याज दर घटा रही है। इस वजह से चिटफंड कंपनिया कई जगहों पर खुल गई हैं।"


बंगाल चिटफंड घोटाले की ओर इशारा करते हुए मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने कहा है कि लोगों को उच्च ब्याज का झांसा देकर जमा राशि लेकर चंपत हो जाने वाली चिटफंड कंपनियों से निपटने के लिए त्रिपुरा देशव्यापी साझा कानून चाहता है।सरकार ने संवाददाताओं से कहा, "राज्य सरकार को शक्ति प्रदान करते हुए चिटफंड कंपनियों के नाम से जानी जाने वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की गैर कानूनी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए पूरे देश के लिए एक साझा कानून भी होना चाहिए।" उन्होंने कहा कि त्रिपुरा की वाम मोर्चा सरकार ने ऐसी कंपनियों से निपटने और निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए कानून बनाने समेत कई कदम उठाए हैं। त्रिपुरा के वित्त मंत्री बादल चौधरी ने  कहा, "कुछ गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां कंपनी अधिनियम 1956 के तहत गठित की गई हैं और उन्हें केंद्र सरकार से लाइसेंस प्राप्त हुआ है। राज्य सरकार के पास ऐसे संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने का सीमित अधिकार है।"


इसी सिलसिले में त्रिपुरा में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के कार्यालयों पर छापा मारा गया और कई दस्तावेज और संपत्तियां जब्त की गईं। इस सिलसिले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।त्रिपुरा सरकार के  एक अधिकारी ने संवाददाताओं से कहा, कि पूरे त्रिपुरा में छापेमारी और जब्ती की कार्रवाई तब तक जारी रहेगी, जब तक कि एनबीएफसी की अवैध गतिविधियां बंद नहीं हो जाती हैं।धड़पकड़ के सिलसिले में त्रिपुरा सरकार एन जीओ को भी बख्श नहीं रही है।आल इंडिया क्रेंच फाउंडेशन के कर्णधार सजल पाल को तीन सौ लोगों के साथ धोखाधड़ी के आरोप में त्रिपुरा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया ।वे पूर्व बांधा घाट ईचाबाजार के वाशिंदा हैं।सोमवार को अपने कार्यालय से ही लोगों की शिकायत पर सजल को गिरफ्तार कर लिया गया।


अधिकारी ने कहा, कि एनबीएफसी के कार्यालयों पर छापा मारने के बाद आधिकारिक दस्तावेज और कंप्यूटर तथा अन्य संपत्तियां जब्त की गईं। उन्होंने कहा कि राज्य में 127 एनबीएफसी और अनिगिनत इकाई काम करती रही हैं, लेकिन पिछले डेढ़ वर्षों में इनमें से 27 ने त्रिपुरा में लोगों से करोड़ रुपये लेकर अपना कारोबार बंद कर दिया।अधिकारी माणिक लाल दास ने कहा कि एक स्वयंभू निदेशक और उसकी महिला प्रबंधक को सोमवार रात गिरफ्तार किया गया, वे एक अवैध एनबीएफसी चला रहे थे, जिसे आमतौर पर चिट फंड के नाम से जाना जाता है। दास ने संवाददाताओं से कहा, कि ऑल इंडिया क्लेंच फाउंडेशन के निदेशक और महिला प्रबंधक ने एक गैर सरकारी संगठन के नाम पर लोगों से अकूत धन एकत्र किया है। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है और उनके कार्यालय की संपत्ति जब्त कर ली है।


इससे पहले त्रिपुरा पुलिस ने 'सेल्फ ट्रस्ट' के निदेशक दीपक साहा को भी गिरफ्तार किया था। अधिकारी ने रविवार को पत्रकारों को बताया, "पूरे राज्य से गुस्साए लोगों के रानीर बाजार में चिटफंड कंपनी के दफ्तर के सामने जमा होने के बाद पुलिस ने पिछली रात (शनिवार को) एक एनबीएफसी 'सेल्फ ट्रस्ट' के निदेशक को गिरफ्तार किया।"


पुलिस ने रविवार को अभियुक्त को अदालत में पेश किया, जिसने उसे पांच दिन के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया।  पुलिस अधिकारी ने कहा, "शुरुआती जांच के अनुसार, यह कंपनी त्रिपुरा में लोगों से कम से कम 3 करोड़ रुपये वसूल चुकी है। चिटफंड के निदेशक बोर्ड के 9 सदस्यों में से चार लोग पश्चिम बंगाल के हैं। पांच  देशक त्रिपुरा के निवासी हैं।"


जनजातीय और गैर-जनजातीय लोगों ने पुलिस को शिकायत की थी कि उनकी जमा रकम की मियाद पूरी होने के बावजूद उन्हें पैसा नहीं दिया जा रहा है।


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