BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

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Saturday, July 14, 2012

सउदी अरब में मरे 3 हजार नेपाली मजदूर

http://www.janjwar.com/2011-05-27-09-09-22/28-world/2865-saudi-arab-men-teen-hazar-mazdooron-kee-maut

सउदी अरब में मरे 3 हजार नेपाली मजदूर


सउदी अरब के जेलों में करीब 200 नेपाली प्रवासी बंद हैं, जिनमें से ज्यादातर को तो यही नहीं पता है कि उनका गुनाह क्या है और उनके मुकदमों की कोई पैरवी करने वाला भी नहीं है. नेपाली प्रवासी अपने देश की कुल आर्थिकी में 40 प्रतिशत की भरपाई करते हैं...

जनज्वार. सउदी अरब में पिछले 12 वर्षों के भीतर 3 हजार नेपाली मजूदरों की मौत हो चुकी है. इतनी बड़ी संख्या में मजदूरों की मौत काम करने की बहुत ही खराब स्थितियों और शोषण की वजह से हुई है. सउदी अरब में करीब 4 लाख 85 हजार प्रवासी मजदूर काम करते हैं, जिनमें से हर 162 मजदूरों में एक इसका शिकार हआ है.

labour-migrant-saudi-arab-nepaliनेपाल में खलबली मचाने वाले इस तथ्य का खुलासा सउदी अरब की राजधानी रियाध स्थित नेपाली दुतावास के राजदूत उदय राज पांडे ने अपनी एक रिपोर्ट में किया है. राजदूत उदय राज पांडे के मुताबिक नेपाली मजदूरों की इतनी बड़ी संख्या में मौत का सबसे बड़ा कारण कालाबाजारी की हुई शराब का उनके द्वारा सेवन किया जाना है, जबकि दूसरा कारण काम करने की खराब स्थितियां जिम्मेदार हैं. 

गौरतलब है कि मुस्लिम देश सउदी अरब में शराब प्रतिबंधित है और मजदूरों को वहां के स्थानीय नागरिकों द्वारा कालाबाजारी की हुई शराब उपलब्ध करायी जाती है. कालाबाजारी की शराब पीने से एक तरफ जहां मजदूर मरते हैं वहीं दूसरी तरफ पकड़े जाने पर कड़ी सजा मिलती है. 

नेपाली राजदूत पंाडे ने रिपार्ट में बताया है कि हर महीने करीब 30 नेपाली मजदूरों की मौत शराब पीने से होती है, जिनमें से कुछ तो काम की जगह से लौटकर रहने के स्थान पर शराब पीने के बाद सोये-सोये ही मर जाते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक कईयों को तो आदत के कारण, लेकिन ज्यादातर को काम की अमानवीय स्थितियों के कारण शराब पीने के लिए मजबूर होना पड़ता है. 

हिमालयी और ठंढे देश नेपाल के लोगों का सीधे बेहद गर्म और शुष्क मरूस्थलों के देश सउदी अरब में काम करने जाना ही अपने आप में मौत के नजदीक जाना होता है. लेकिन नेपाल में जारी आर्थिक संकट और रोजगार के अभाव में अपना और परिवार का पेट चलाने के लिए ऐसी जगहों में जाना ही पड़ता है. 

नेपाल से हर साल हजारों औरत-मर्द रोजगार की तलाश में दूसरे देशों में जाते हैं. इनमें से भारत और चीन को छोड़ बाकी देशों में वे यात्री वीजा पर रहते हैं और रोजगार करते हैं. यह प्रवृत्ति पिछले वर्षों में नेपाल में बहुत बढ़ी है, जिसका एक कारण नेपाल में मानव तस्करी का फैला जाल है. देह व्यापार के अपराध में लगे माफिया नेपाली औरतों-मर्दों की देहव्यापार और बंधुआ मजदूरी के लिए दुनिया भर में सप्लाई करते हैं. इसी कारण नेपाल की एक अदालत ने पिछले दिनों छह लड़कियों की तस्करी मामले में पकड़े गये एक शख्स को भारी आर्थिक जुर्माने के साथ 170 साल की सजा सुनायी है. 

उल्लेखनीय है कि पुरी दुनिया में करीब 50 देशों में नेपाली प्रवासी रोजगार के लिए जाते हैं, जिनमें से सर्वाधिक कतर (69 हजार), सउदी (45 हजार) और मलेशिया में (31 हजार) में हैं. यह पूछने पर कि इन बुरी स्थितियों से नेपाल के मजदूरों को कैसे बचाया जाये, नेपाली प्रवासी समन्यवय समिति के अध्यक्ष महेंद्र पांडेय के कहते हैं, 'देश छोड़ने से पहले लोगों को पूरी जानकारी दी चाहिए कि वहां के काम के क्या हालात हैं और वे इससे कैसे सुरक्षित रहे सकते हैं. हालांकि मुस्लिम देशों में काम की स्थितियां बेहद ही भयावह हैं. नेपाल से गये बहुतेरे लोग तो गुलाम के तौर पर भी काम करने को मजबूर होते हैं.' 

मौजूदा समय में सउदी अरब के जेलों में करीब 200 नेपाली प्रवासी बंद हैं, जिनमें से ज्यादातर को तो यही नहीं पता है कि उनका गुनाह क्या है और उनके मुकदमों की कोई पैरवी करने वाला भी नहीं है. नेपाल की कुल आबादी में से 70 लाख लोग प्रवासी हैं. नेपाली प्रवासी अपने देश की कुल आर्थिकी में 40 प्रतिशत की भरपाई करते हैं.



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