BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

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Saturday, July 14, 2012

चार महीनों में 24 हज़ार बच्चों की मौत

http://www.janjwar.com/2011-05-27-09-00-20/25-politics/2862-char-mahinon-men-kuposhan-se-char-hazar-bacchon-kee-maut

हर साल लगभग 16 लाख नवजात शिशु दम तोड़ देते हैं. तीन वर्ष से कम के हर दो बच्चों में से एक कुपोषण का शिकार होता है. नन्दी फाउंडेशन द्वारा पेश की गई 'हंगर एंड मालन्युट्रिशन' रिपोर्ट में हुआ यह खुलासा वाकई शर्मनाक है...

जनज्वार. महाराष्ट्र विधानसभा में पेश किये गये एक आंकड़े के मुताबिक राज्य में बीते चार महीनों में तकरीबन 24000 बच्चे कुपोषण के कारण मौत के मुंह में समा गये. राज्य सरकार को कुपोषण के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए यह भयावह आंकड़ा विपक्षी विधायकों ने महाराष्ट्र विधानसभा में रखा. इस आंकड़े को तो सरकार ने सही माना, पर अपने बचाव में यह दलील में वह यह सफाई पेश करना भी नहीं भूली कि इन सभी बच्चों की मौत कुपोषण के कारण नहीं हुयी है. मौत के लिए अन्य कारण भी जिम्मेदार हैं.

child-malnutrition

महाराष्ट्र विधानसभा में यह आंकड़ा पेश करते हुए तीन विपक्षी विधायकों भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुधीर मुदगंटीवार, राकांपा विधायक जितेंद्र आव्हाड़ और शशिकांत शिंदे ने कहा कि महारा'ट्र में जनवरी 2012 में दस लाख 67 हजार 659 बच्चे कुपोषण का शिकार थे और मई 2012 तक इनमें से 24 हजार 365 बच्चों की मौत हो गयी. 

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में देश कि आर्थिक राजधानी मुंबई होने के चलते यह अन्य राज्यों के मुकाबले सम्पन्न राज्य कहलाता है, मगर मात्र चार महीनो में हुई हजारों बच्चों की मौत का या आंकड़ा दर्शाता है कि यहाँ भी हर साल हजारों बच्चे मरने को मजबूर हैं. राज्य के नंदूरबार जनपद् में पिछले साल 49 हजार, नासिक में एक लाख, मेलघाट में चालीस हजार, औरंगाबाद में 53 हजार, पुणे जैसे सम्पन्न शहर में 61 हजार और मराठवाड़ा में 24 हजार बच्चे कुपोषण का शिकार बने.

मुंबई का हाल भी बहुत अच्छा नहीं है. यहाँ के अस्पतालों में हर रोज 100 से ज्यादा कुपोषण के शिकार बच्चे भर्ती हो रहे हैं और इनमे से 40 फीसदी की मौत हो जाती है. साल भर में सिर्फ मुंबई में ही 48 हजार बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं.

पिछले साल भूख और कुपोषण संबंधी एक रिपोर्ट जारी करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कुपोषण की समस्या को देश के लिए शर्मनाक बताया था. प्रधानमंत्री ने कहा था कि 'कुपोषण की समस्या पूरे देश के लिए शर्म की बात है. सकल घरेलू उत्पाद में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी के बावजूद देश में कुपोषण का आंकड़ा देश में बढ़ता जा रहा है. हमें उन राज्यों पर खासतौर से ध्यान केंद्रित करना होगा जहां कुपोषण सबसे ज़्यादा है और इस समस्या को बढ़ावा देने वाली परिस्थितियां मौजूद हैं. हमारी सरकार आईसीडीएस को नए ढांचे के तहत, नई ताकत के साथ कुपोषण के शिकार देश के 200 ज़िलों पर केंद्रित करेगी. सरकार का मक़सद कुपोषण के खिलाफ़ देशव्यापी जागरुकता छेड़ना है.'

भूख और कुपोषण को लेकर नंदी फ़ाउंडेशन और 'सिटिज़ंज़ अलाएंज़ अगेंस्ट मैलन्यूट्रिशन' नामक संगठन की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक़ कुपोषण की वजह से भारत में आज भी 42 फ़ीसदी से ज़्यादा बच्चे सामान्य से कम वज़न के हैं. यह समस्या कितनी गंभीर है यह इस बात से साबित होता है कि भारत के आठ राज्यों में जितना कुपोषण है उतना अफ्रीका और सहारा उपमहाद्वीप के ग़रीब से ग़रीब देशों में भी नहीं.

जहाँ तक पूरे देश में कुपोषण के चलते होने वाली मौत का सवाल है तो हर साल लगभग 16 लाख नवजात शिशु दम तोड़ देते हैं. तीन वर्ष से कम के हर दो बच्चों में से एक कुपोषण का शिकार होता है. नन्दी फाउंडेशन द्वारा पेश की गई 'हंगर एंड मालन्युट्रिशन' रिपोर्ट में हुआ यह खुलासा वाकई शर्मनाक है.

यह रिपोर्ट नन्दी फाउंडेशन द्वारा छह राज्यों के एक लाख से ज्यादा बच्चों के सर्वेक्षण पर जारी की गयी थी. इसके मुताबिक छह वर्ष से कम आयु के 42 प्रतिशत तक बच्चों का वजन कम होता है और 50 प्रतिशत बच्चे गंभीर बीमारियों का शिकार होते हैं. कुपोषण का सबसे ज्यादा असर कम आमदनी वाले परिवारों के बच्चों पर होता है.

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