BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

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Saturday, July 14, 2012

महिलाओं की खाप, मिटाओ बेटी होने का अभिशाप

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महिलाओं की खाप, मिटाओ बेटी होने का अभिशाप

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पुरुष खाप पंचायत के तथाकथित तुगलकी फरमानों के बीच हरियाणा के जींद जिले के बीबीपुर गांव में एक अनोखी खाप बैठी. यह महिलाओं की खाप पंचायत थी. पहली बार हुई महिलाओं की इस खाप पंचायत में खुलकर मांग की गई कि कोख में बेटी को मारनेवालों को मृत्युदंड की सजा दी जानी चाहिए. हालांकि महिलाओं ने इस तरह की खाप पंचायत आयोजित करके पुरुष खाप पंचायतों को सख्त संदेश दिया है लेकिन उनके खाप की यह जवाबी कार्रवाई तब कमोजर नजर आने लगी जब उन्होंने बेटी बचाने के लिए उसी पुरुष खाप पंचायतों का समर्थन मांग लिया जिसके विरोध में इस पंचायत का आयोजन किया गया था.

इसके अलावा भी सवाल कई हैं। क्या जो खाप पंचायते ऑनर किलिंग जैसे अपराध को बढ़ावा देती हैं वे इस पर समर्थन देंगे? अगर ऐसा कानून बना भी दिया जाए तो क्या कोख में हत्याएं कम होंगी?

अभी खबर आई थी कि उत्तर प्रदेश की एक खाप पंचायत ने महिलाओं के बाजार जाने पर और मोबाइल पर बात करने पर रोक लगा दी है। हरियाण की खाप पंचायतें तो ऑनर किलिंग के लिए वैसे ही बदनाम हैं। जहां इज्जत के नाम पर अपने ही बच्चों को मारने से पीछे नहीं हटते। जिन्हें उन्होंने 20-25 साल तक पाला है। यहां तो बात उस बच्चे की मौत की हो रही है जो दुनिया में अभी आया भी नहीं है। देश में ऐसी खाप पंचायतों का बोलबाला है जिसकी बात काटने की हिम्मत वहां कोई नहीं करता। पुलिस भी इस मामलों से दूरी बनाए रखना ही सही समझती है। उस पुरुष प्रधान खाप पंचायतों से इस विषय में समर्थन मिलना थोड़ा मुश्किल लगता है। इस बात पर समर्थन देने पर एक पेंच और है कि जब ये खाप पंचायते सरकार की नहीं सुनती। और उनके फैसले के बीच में आने पर सरकार और प्रशासन को ही खरी खोटी सुना देते हैं तो फिर वे महिला खाप पंचायत की बात मानेंगे इस बात की आशा थोड़ी कम है।

भारत में हत्या के लिए पहले से कड़े कानून मौजूद हैं। फिर भी आए दिन हत्या के मामले दर्ज होते रहते हैं। तो क्या गारंटी है कि अगर ऐसा कानून बना दिया जाए तो कोख में हत्याएं कम हो जाएंगी। इसका यह मतलब नहीं है कि हम इन हत्याओं को रोकने के लिए कोई ठोस कानून न बनाए। कानून जरुर बनाए पर उसके साथ-साथ ऐसी जागरुकता भी फैलाने की जरुरत है जिससे लोग बेटियों को बोझ न समझे। क्योंकि कोख में बेटियों की हत्या का मुख्य कारण हैं उसकी शादी में आनेवाला खर्च और यह सोच की बेटा होगा तो वंश आगे चलाएगा और बुढ़ापे का सहारा बनेगा। इस सोच को बदलेंगे तभी इन हत्याओं पर लगाम लगाई जा सकती है।

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