BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

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Sunday, May 6, 2012

ओ री चिड़ैया, नन्‍हीं सी चिड़िया… अंगना में फिर आ जा रे!

 आमुखसंघर्ष

ओ री चिड़ैया, नन्‍हीं सी चिड़िया… अंगना में फिर आ जा रे!

6 MAY 2012 8 COMMENTS

♦ अविनाश


डीडी नेशनल यानी दूरदर्शन पर सत्‍यमेव जयते देख कर मोहल्‍ला लाइव की एक पुरानी पोस्‍ट याद आ गयी, "चाह कर भी वे मेरी बेटियों को मार नहीं पाएंगे"। एक खूबसूरत पहल है, जिसकी अनदेखी सिर्फ इस वजह से नहीं की जानी चाहिए कि इसे एक स्‍टार ने पेश किया है। बीबीसी के संवाददाता सुशील झा ने जब यह एफबी स्‍टैटस लिखा,

फेसबुक पर आमिर खान के फैन लोगों की बाढ़ आ गयी है। लगता है कि भ्रूण हत्या पर आमिर खान ही एकमात्र मनुष्य हैं जो बोल रहे हैं। हद है। लोगों को अपने घर और बहन और भ्रूण तब तक नहीं दिखते, जब तक कोई स्टार उन्हें नहीं दिखाता। अजब चूतियापा है।


मुझे यह थोड़ा अजीब लगा। लगा कि एक ऐसे वक्‍त में, जब डब्‍ल्‍यू डब्‍ल्‍यू एफ, बिग बॉस जैसे रियलिटी शो के लोग दीवाने हुए जा रहे हों, आमिर के सत्‍यमेव जयते पर इस तरह से रिएक्‍ट नहीं करना चाहिए था। मैंने टिप्‍पणी की…

भाई, थोड़ा विनम्र होकर सोचें। आमतौर पर हमारे देश में इतनी तरह की मुश्किलें हैं कि लगता है उनसे जूझ पाना कतई संभव नहीं। कन्‍या भ्रूण हत्‍या पर कई लोगों ने बात की है, कई मुहिम शुरू हुई है… लेकिन इस मसले पर हर एक की पहलकदमी जरूरी और महत्‍वपूर्ण है। आमिर खान को वोट दीजिए। कम से कम वो सलमान की तरह बिग बॉस और शाहरूख की तरह आईपीएल के रास्‍ते पैसा और पॉपुलरिटी नहीं खोज रहे। इसी बात को सलाम कीजिए कि कन्‍या भ्रूण हत्‍या के खिलाफ उठी बहुतेरी आवाजों में आमिर खान जैसे लोगों ने भी अपनी एक आवाज शामिल की है।


मेरे समझने में गलती यह हुई थी कि मैं सुशील झा के स्‍टैटस को इस शो के खिलाफ समझ रहा था, जबकि वह उन लोगों पर टिप्‍पणी थी, जिनकी अंतरात्‍मा को जगाने के लिए एक स्‍टार की जरूरत पड़ती है। सुशील झा ने अपनी प्रति-टिप्‍पणी में इसे स्‍पष्‍ट भी किया…

हम तो बिल्कुल विनम्रता से ही बोल रहे हैं और गलत न समझें। मेरी शिकायत आमिर खान से कतई नहीं है। मेरी शिकायत उन लोगों से है, जिन्हें भ्रूण हत्या जैसी समस्या का अंदाजा तब लगता है, जब एक स्टार बताता है। ये अद्भुत है। सलमान शाहरुख सब बेचें, आमिर भी करें लेकिन समस्या समाज से है। फेसबुक पर भ्रूण हत्या का विरोध करने से नहीं होता है। हमारे आसपास ही ऐसे लोग हैं जो बेटियों को बोझ समझते हैं। उनकी मानसिकता का क्या करूं। गुस्सा इस बात पर है और कुछ नहीं। कोई बात बुरी लगे तो माफी चाहता हूं।


इस पर मेरा भी कुछ कहना लाजिमी था, सो मैंने कहा…

लोग तो अपना अपना दफ्तर जीते हैं भाई। हम सब हैं उसमें। जो सड़क पर आते हैं, उनसे भी एसोसिएट होने में हमें दिक्‍कत होती है। ऐसा नहीं है कि आमिर कन्‍या भ्रूण का मसला उठा रहे हैं, तो लोग इस समस्‍या को पहली बार समझ रहे हैं। लोग समस्‍या समझें और उसको सुलझाने के लिए आगे बढ़ें, इस‍के लिए लोगों को बार बार उकसाना, प्रेरित करना बहुत जरूरी है। आमिर को शुक्रिया अदा कीजिए कि इस मसले पर उन्‍होंने लोगों की आंखों में आंसू ला दिये। वरना लोग तो अब रोना ही भूल चुके हैं।


कुल मिलाकर एक अच्‍छा काम हुआ है। इस अच्‍छे काम के लिए अगर सत्‍यजीत भटकल का शुक्रिया अदा न किया जाए, तो ये बेईमानी होगी। कॉनसेप्‍ट उन्‍हीं का है और अवधारणा भी उन्‍हीं की है। सत्‍यजीत मराठी के एक जाने-माने प्रकाशक परिवार से आते हैं और आमिर खान के बचपन के दोस्‍त हैं। वे वकील थी और आमिर ने उनकी वकालत छुड़वा कर उन्‍हें लगान की प्रोडक्‍शन टीम में शामिल किया था। उन्‍होंने बच्‍चों के जोकोमोन जैसी फिल्‍म बनायी थी, जिसे बच्‍चों ने काफी पसंद किया था।

आइए आखिर में हम स्‍वानंद किरकिरे की आवाज में 'ओ री चिड़ैया' फिर से सुनें, जिसे सुनते हुए सत्‍यमेव जयते की पहली कड़ी के आखिरी चंद दृश्‍यों में देखने-सुनने वाले रो पड़े थे…


(अविनाश। मोहल्‍ला लाइव के मॉडरेटर। प्रभात खबर, एनडीटीवी और दैनिक भास्‍कर से जुड़े रहे हैं। राजेंद्र सिंह की संस्‍था तरुण भारत संघ में भी रहे। उनसे avinash@mohallalive.com पर संपर्क किया जा सकता है।)


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