BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

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Sunday, February 5, 2012

अमेठी और रायबरेली में दांव पर प्रियंका की साख

Sunday, 05 February 2012 12:31

अमेठी, पांच फरवरी (एजेंसी) उत्तर प्रदेश की जातिवादी राजनीति को बदलकर विकासवादी बनाने का बीड़ा उठाने वाले अपने सांसद भाई राहुल गांधी से अमेठी और रायबरेली की 10 सीटों पर जीत दिलाने का वादा निभाने के मिशन पर निकली कांग्रेस की स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी की साख इस बार दांव पर है। अमेठी और रायबरेली संसदीय क्षेत्रों को आजादी के बाद से ही नेहरू-गांधी परिवार की राजनीतिक विरासत की थाती माना जाता है और इन दोनों क्षेत्रों में आने वाली 10 विधानसभा सीटों के परिणाम राहुल के 'मिशन-2012' की सफलता के लिहाज से ना सिर्फ महत्वपूर्ण हैं, बल्कि उनके नतीजे कांग्रेस महासचिव के सियासी कद को भी तय करेंगे। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि प्रियंका की भी साख दांव पर है।
कांग्रेस आलाकमान को अमेठी और रायबरेली में आने वाले 10 विधानसभा क्षेत्रों में व्याप्त विषम राजनीतिक परिस्थितियों का बखूबी एहसास है। यही वजह है कि वह प्रियंका को अमेठी और रायबरेली पर ही ध्यान केन््िरदत करने को कह रहा है।
कांग्रेस की व्यग्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रियंका जैसी स्टार प्रचारक को पांच दिन तक अमेठी में ही रहकर भावनात्मक अपील के जरिये मतदाताओं की नब्ज टटोलने और उन्हें झकझोरने का जिम्मा सौंपा गया है। 
खुद प्रियंका ने भी अपने अमेठी दौरे के पहले दिन शुक्रवार को स्वीकार किया कि उन्हें अमेठी तथा रायबरेली के 10 विधानसभा क्षेत्रों पर ही ध्यान देने को कहा गया है और सम्भवत: वह इन्हीं जिलों तक सीमित रहेंगी।
अमेठी के आम मतदाताओं के जेहन में कहीं ना कहीं यह बात बैठी है कि प्रियंका सिर्फ चुनाव के वक्त ही क्षेत्र में आती हैं और उसके बाद वह यहां की जनता की सुध नहीं लेतीं। ऐसे में उनकी अपीलों पर कितना विश्वास किया जाए।
प्रियंका को भी इस बात का एहसास है और वह कार्यकर्ताओं के साथ बैठकों तथा जनसभाओं में अपनी इस भूल को मान चुकी हैं। साथ ही इस बात का विश्वास भी दिला रही हैं कि अब उन्हें शिकायत का मौका नहीं मिलेगा।
सपा और बसपा ने अमेठी तथा रायबरेली में कांग्रेस की जमीन खिसकाने के लिये खास किलेबंदी की है। कांग्रेस के लिये यह भी चिंता की बात है।
अमेठी के चुनावी माहौल पर नजर डालें तो इस बार कांग्रेस को कड़ी चुनौती मिल रही है। वर्ष 2007 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जिले की पांच में से तीन अमेठी, जगदीशपुर और सलोन सीटों पर कामयाबी मिली थी, 

लेकिन इस बार सियासी समीकरण बदल गये हैं।
पिछले चुनाव में कांग्रेस को मिली तीन सीटों में से कम से कम दो पर कांग्रेस प्रत्याशियों को प्रतिद्वंद्वियों से तगड़ी टक्कर मिल रही है। 
अमेठी सीट से कांग्रेस प्रत्याशी मौजूदा विधायक अमिता सिंह को सपा के गायत्री प्रसाद प्रजापति और बसपा के आशीष शुक्ला से कड़ी चुनौती मिल रही है।
जगदीशपुर सीट पर मौजूदा कांग्रेस विधायक रामसेवक धोबी के निवेदन पर पार्टी ने उनके नाती राधेश्याम कनौजिया को प्रत्याशी बनाया है। राधेश्याम राजनीति में बिल्कुल नये हैं और उन्हें प्रतिद्वंद्वियों से कड़ी टक्कर मिल रही है।
पिछली बार बसपा के खाते में गयी गौरीगंज सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी मोहम्मद नईम अच्छी स्थिति में दिखाई पड़ रहे हैं। क्षेत्र से मौजूदा बसपा विधायक चं्रद प्रकाश मिश्र हत्या के एक मामले में नामजद किये जा चुके हैं और नईम उनकी राह मुश्किल कर सकते हैं।
अमेठी की तिलोई सीट पर कांग्रेस की स्थिति ठीक-ठाक है, लेकिन सलोन सीट के समीकरण उसके लिये मुश्किल खड़ी कर सकते हैं। इस सीट पर मौजूदा विधायक और कांग्रेस के प्रत्याशी शिवबालक पासी का बसपा के विजय अम्बेडकर से कांटे का मुकाबला है।
रायबरेली के चुनावी परिदृश्य पर नजर डालें तो वहां की पांच में से चार सीटों पर कांग्रेस का ही कब्जा है, लेकिन इस बार उसे सपा जोरदार टक्कर दे रही है।
रायबरेली सदर सीट पर निर्दलीय बाहुबली विधायक अखिलेश सिंह पिछले करीब 18 साल से काबिज हैं। इस बार वह पीस पार्टी के उम्मीदवार हैं। कांग्रेस ने इस सीट से अवधेश प्रताप सिंह को प्रत्याशी बनाया है जिनके सामने अखिलेश के तिलिस्म को तोड़ने की कठिन चुनौती है और उन्हें 'प्रियंका मैजिक' का सहारा है।
हरचंदपुर सीट से मौजूदा कांग्रेस विधायक और प्रत्याशी शिव गणेश को सपा के सुरेन््रद विक्रम सिंह से तगड़ी टक्कर मिल रही है। यही हाल बछरावां का है, जहां सपा प्रत्याशी रामलाल अकेला कांग्रेस उम्मीदवार राजा राम त्यागी के लिये कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं।
सरेनी सीट से कांग्रेस प्रत्याशी अशोक सिंह और सपा के देवेन््रद प्रताप सिंह के बीच जोर आजमाइश है। इसके अलावा उच्च्ंचाहार सीट से कांग्रेस विधायक और उम्मीदवार अजय पाल सिंह को ब्राह्मणों की कथित उपेक्षा का नुकसान उठाना पड़ सकता है जिसका फायदा सपा प्रत्याशी मनोज कुमार पाण्डेय को मिलने के आसार हैं।
कुल मिलाकर कांग्रेस के गढ़ अमेठी तथा रायबरेली में कांग्रेस प्रत्याशियों के लिये चुनावी मुकाबला पूर्व कभी इतना कठिन नहीं दिखा। अब देखना यह है कि प्रियंका का जादू इन जिलों के मतदाताओं के सिर चढ़कर बोलता है या नहीं।

 

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