BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

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Thursday, July 25, 2013

चुनाव पूर्व सर्वे में खेल, तीसरा मोर्चा बनाएगा सरकार !

चुनाव पूर्व सर्वे में खेल, तीसरा मोर्चा बनाएगा सरकार !


हस्तक्षेप टीम

 

मीडिया मैनेजमन्ट के जरिये 2014 में दिल्ली की सल्तनत पर उचक कर चढ़ने की कवायद जोरों से शुरू हो गयी है। लोकसभा चुनाव 2014 में होना है लेकिन सर्वे एजेंसियाँ सर्वे कर रही हैं कि अगर आज चुनाव हो जाये तो कौन बाजी मारेगा। लेकिन यह एजेंसियाँ यह बता कर नहीं दे रहीं कि देश के सामने वह कौन सी मुसीबत आ गयी है कि चुनाव आज ही हो जायेगा ?

बहरहाल एक निजी समाचार चैनल के लिये काम करने वाली एक सर्वे एजेंसी ने देश के 18 राज्यों में फैले 267 लोकसभा क्षेत्रों में हर लोकसभा क्षेत्र के कम से कम एक विधानसभा क्षेत्र के कम से कम 4 पोलिंग स्टेशन पर जाकर कुल 1120 इलाकों 39000 वोटरों से संपर्क साध कर और 19062 लोगों के बीच जून के आखिरी हफ्ते और जुलाई के पहले हफ्ते में सर्वे करके इस देश की तकदीर लिख दी।

इस सर्वे के मुताबिक अगर सही अर्थ निकाला जाए तो 2014 में न यूपीए की सरकार बनेगी और न एनडीए की बल्कि अन्य दल अगर एकजुट हो गये तो मजबूत सरकार बनाले जायेंगे। सर्वे के मुताबिक यूपीए और एनडीए दोनों को 29-29 फीसदी वोट मिल रहे हैं और अन्य को छप्पर फाड़ थोक में 42 फीसदी मत मिल रहे हैं। सर्वे का कहने है कि अगर चुनाव जुलाई-अगस्त 2011 में हो जाते तो यूपीए फायदे में रहता और उसे 38 फीसदी वोट मिलते जबकि एनडीए को कम फायदा होता और उसे 26 फीसदी मत मिलते।

गौर करने वाली बात है कि सर्वे के मुताबिक काँग्रेस को 28 फीसदी मत मिल रहे हैं और उसके सहयोगियों को कुल एक प्रतिशत। जबकि भाजपा को 2009 के 19 फीसदी के मुकाबले 8 फीसदी का बम्पर मुनाफा हो रहा है  और उसे 27 फीसदी मत मिल रहे हैं हालाँकि उसके सहयोगियों को 2009 के 5 फीसदी के मुकाबले जबर्दस्त नुकसान हो रहा है और कुल 2 फीसदी मत ही मिल रहे हैं।

लगता है सर्वे एजेंसी या तो रिपोर्ट में सही तालमेल नहीं बना पायी या उसकी गणित कुछ गड़बड़ा गयी। हमें जो सर्वे की रिपोर्ट सूत्रों से प्राप्त हुयी है उसके मुताबिक उप्र की प्रमुख विपक्षी दल बसपा के मतों में कोई अंतर नहीं हो रहा और उसका 6 फीसदी मत बरकरार है जबकि सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी को 2009 के मुकाबले एक फीसदी का फायदा हो रहा है और उसे 4 फीसदी मत मिल रहे हैं।

सर्वे के मुताबिक यूपीए को 7 फीसदी मतों का नुकसान हो रहा है जबकि एनडीए को 5 फीसदी का फायदा हो रहा है। अब प्रश्न उठता है कि यूपीए को नुकसान कहाँ हो रहा है और राजग को फायदा कहाँ हो रहा है। सर्वे स्वयं कह रहा है कि राजग के सहयोगियों को 3 फीसदी का नुकसान हो रहा है यानी भाजपा को अगर 8 फीसदी का फायदा हो तो राजग का फायदा 3 फीसदी होगा। अब यह आठ फीसदी मत भाजपा को कहाँ बढ़ रहे हैं बंगाल की खाड़ी में या कन्याकुमारी में, शायद सर्वे यह बताना भूल गया है। उसके अनुसार भाजपा को उत्तर प्रदेश में छप्पर फाड़ के वोट मिल रहे हैं।

अब तक का इतिहास बताता रहा है कि उत्तर प्रदेश में आकर सारे सर्वे फेल हो जाते हैं। इस सर्वे पर नज़र डालें तो यह कहता है कि बसपा का 6 फीसदी मत स्थिर है और सपा को 1 फीसदी का फायदा होकर 4 फीसदी मत मिल रहा है। फिर भाजपा को कौन सा वोट मिल गया?

आखिर उत्तर प्रदेश में 80 लोकसभा की सीटों में कौन कितनी ले जा सकता है। इस सर्वे के मुताबिक अगर अभी चुनाव हों तो भाजपा उत्तर प्रदेश में 29 से 33 सीटें तक जीत सकती है। 2009 की 10 सीटों के मुकाबले पार्टी तीन गुना ज्यादा सीटें जीत सकती हैं। वहीं सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी को 17 से 21 सीटें तक मिल सकती हैं। 2009 में पार्टी को प्रदेश से 22 लोकसभा सीटें हासिल हुयी थीं। बसपा 14-18 सीटें झटक सकती है, जबकि पिछली बार उसे 20 सीटें मिली थीं। कांग्रेस को सिर्फ 11 से 15 सीटें मिलने के आसार हैं, सर्वे मानता है कि पिछले आम चुनाव में राहुल गांधी के ताकत लगाने से पार्टी को 22 सीटें मिली थीं। राष्ट्रीय लोकदल को 2 सीटें मिल सकती हैं।

चौंकाने वाला आंकड़ा है कि भाजपा को 27 फीसदी वोट मिल सकते हैं यानी पिछली बार के मुकाबले 9 फीसदी ज्यादा! वहीं राज्य में मौजूदा सरकार चला रही समाजवादी पार्टी को 22 फीसदी वोट मिल सकते हैं यानी पिछली बार के मुकाबले 1 फीसदी कम। (फिर पूरे देश भर में सपा का एक फीसदी वोट कहाँ बढ़ रहा है?)

इसी तरह मायावती की बसपा को भी 21 फीसदी तक वोट नसीब हो सकते हैं। ये वोट भी पिछली बार के मुकाबले 1 फीसदी कम हैं। कांग्रेस 16 फीसदी वोट पा सकती है। पिछली बार पार्टी को 2 फीसदी ज्यादा वोट मिले थे। अजित सिंह की राष्ट्रीय लोकदल सिर्फ 1 फीसदी वोट ही पा सकती है। पिछली बार के मुकाबले उसका वोट बैंक 2 फीसदी घट सकता है। वहीं अन्य और निर्दलियों के वोट 3 फीसदी तक बढ़ सकते हैं। इस बार उन पर 13 फीसदी तक वोट पड़ सकते हैं।

अब देखिए ! सर्वे के नतीजे बता रहे हैं कि एक साल के भीतर ही अखिलेश सरकार ने अपनी लोकप्रियता गँवा दी है और समाजवादी पार्टी का नुकसान ही भाजपा का सीधा फायदा है। सर्वे साफ कह रहा है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस चमक खोती दिख रही है। वहीं भाजपा चमक पाती नजर आ रही है। समाजवादी पार्टी का जलवा-जलाल ढलान पर आ सकता है। 26 फीसदी लोग ही अखिलेश सरकार को बेहतर मान रहे हैं। जबकि 29 फीसदी का कहना है कि माया सरकार बेहतर है। लेकिन मुलायम के लिए अच्छी खबर ये है कि 46 फीसदी मुस्लिम अखिलेश सरकार से संतुष्ट हैं तो अन्य पिछड़ा वर्ग के 30 फीसदी वोटर भी राज्य सरकार से संतुष्ट हैं।

अब यूपी को समझने वाला औसत बुद्धि व्यक्ति भी गणित में इतना कमजोर नहीं हो सकता कि 46 फीसदी मुस्लिम जब अखिलेश सरकार से संतुष्ट हैं और बसपा व कांग्रेस को भी नुकसान हो रहा है तब यह 54 फीसदी मुसलमान किसे वोट करेगा ? याद होगा कि 2009 के चुनाव में मुस्लिम मतों का एक बड़ा हिस्सा ढुलकर कांग्रेस के साथ चला गया था जिसके चलते सपा को नुकसान हुआ था और कांग्रेस को फायदा हुआ था। अब अगर मुस्लिम सपा से नाराज़ है तो क्या भाजपा को वोट दे रहा है ? अब यह गणित तो समझना बड़ा दिलचस्प होगा कि सपा को नुकसान कैसे भाजपा को फायदे में बदल जायेगा।

मज़ेदार बात यह है कि इसी सर्वे एजेंसी ने फरवरी 2009 में भी ऐसा ही सर्वे किया था और घोषणा की थी कि यूपीए को 36.6 फीसदी मत मिलेंगे और एनडीए को 29.4 फीसदी मत मिलेंगे। लेकिन जब नतीजे आए तो यूपीए को मिले 36 फीसदी और एनडीए को मिले 24 फीसदी।

इसलिए 2014 के चुनाव आने तक ऐसे कई सर्वे लोगों का अच्छा मनोरंजन कराते रहेंगे। जमाना पीआर का है। कहीं नारा लग रहा था एपको से चिपको…..


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