BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

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Monday, February 1, 2016

बुद्धम् शरणम् गच्छामि! साधो,मुर्दो के गांव शहर कस्बे में जो भी हो जिंदा,उठ खड़े हों अमन के लिए कयामत के मुकाबले! पलाश विश्वास



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बुद्धम् शरणम् गच्छामि!

साधो,मुर्दो के गांव शहर कस्बे में जो भी हो जिंदा,उठ खड़े हों अमन के लिए कयामत के मुकाबले!

पलाश विश्वास


रोहित वेमुला अगर एससी है तो भी ओबीसी और एसटी साथ है..

रोहित वेमुला अगर ओबीसी है तो भी एससी और एसटी साथ है..

रोहित वेमुला अगर एसटी है तो भी ओबीसी और एससी साथ है..

रोहित वेमुला अगर भारतीय है तो भी एससी,ओबीसी और एसटी साथ है..

प्रश्न ये उठता है कि रोहित बेमुला अगर एससी है तो हिन्दू है या नहीं?

प्रश्न ये उठता है कि रोहित बेमुला अगर एसटी है तो हिन्दू है या नहीं?

प्रश्न ये उठता है कि रोहित बेमुला अगर ओबीसी है तो हिन्दू है या नहीं?

प्रश्न ये उठता है कि रोहित बेमुला अगर एससी और हिन्दू है तो बजरंग दल कहाँ है?

प्रश्न ये उठता है कि रोहित बेमुला अगर ओबीसी और हिन्दू है तो RSS कहा है?

प्रश्न ये उठता है कि रोहित बेमुला अगर एसटी और हिन्दू है तो भाजपा किधर है?

~Aalok Yadav

अब यह जात पांत की लड़ाई नहीं है।इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि रोहित मनुस्मृति और न जाने किस किस मंत्रालय के मंत्रियों या बजरंगी सिपाहसालारों के मुताबिक दलित है या ओबीसी या धर्मांतरित अल्पसंख्यक।


हर राज्य में आरक्षण के बहान कमंडल मंडल गृहयुद्ध की राजनीति और रणनीति से भी फर्क नहीं पड़ने वाला है और फासिज्म के सारे किलों की नाकाबंदी होगी,अरविंद केजरीवाल के शब्दों में जो पुलिस दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों को निजी सेना की तरह मार रही थी और पत्रकारों को भी बख्शा नहीं,वे अपने त्रिसुल से अब किसी भारतीय का वध करने से पहले सोच लें कि इस देश की माटी से हिंसा और घृणा की मनुस्मृति के विरुद्ध फिर बुद्धं शरणं गच्छामि के मंत्रोच्चार के साथ बहुजन जनता वैदिकी अश्वमेध के किलप गोलबंद होने लगी है।


आलोक यादव को हम नहीं जानते।मगर लिखा यह देश का कुल मिजाज है जो मनुस्मृति राज में अस्मिताओं में बंटकर खामोश कयामत बर्दाश्त करेगी नहीं।


कोलकाता और नई दिल्ली में आरएसएस मुख्यालयों पर न्याय और समता की मांग के लिए प्रदर्शन कर रहे छात्रों युवाओं पर जो हमले हुए,उसके बाद सहिष्णुता असहिष्णुता का विवाद खत्म हो जाना चाहिए।


फासिज्म के राजकाज में न कानून का राज है और न संविधान है।


नागरिकता और नागरिक अधिकार निलंबित हैं।


प्राकृतिक संसाधनों की खुली लूट है और धर्म के नाम देश नीलाम है।


यह सीधे मनुष्यता और प्रकृति के लिए,देश के लिए देशभक्त नागरिकों का मोर्चा है।जो अभी अभी शुरु हुआ है।इस रात की सुबह न होने तक मोर्चाबंदी का सिलसिला देश के कोने कोने में जारी है।


नागपुर के संघ मुख्यालय पर भी मोर्चा लगा है।


तो समझ लें कि जब बंगाल के दलित सड़कों पर आने लगे हैं तो हमारे बच्चे अकेले न पिटे जायेंगे और न मारे जायेंगे।


आगे क्या करना हैं,जनता बखूब जानती है जो चुनावी धर्मोन्मादी ध्रवीकरण के खिलाड़ी समझ नहीं रहे हैं और फर्जी सुनामी से समझ रहे हैं कि सारी आवाजें कुचल देंगे तो भी मुक्तबाजार में कोई बोलेगा नहीं।ख्वाबो के सौदागर ख्वाबों का हल नहीं जाने हैं।


जन सुनवाई नहीं है।

मीडिया बिकाउ है।


सोशल मीडिया पर पहरा है।


इस अंधियारे में हम हजारों साल से जिंदा हैं,लेकिन हुकूमत को भी मालूम नहीं है कि अंधियारे के इस आलम में कैसे जमीन पकने लगी है और सीमेंट के जंगल में जल जमीन जंगल और फसल की खुशबू आती नहीं है और न कागज के खिलखिलाते फूल इंसानियत के वजूद को मिटाने की ताकत रखते हैं।


बाजू भी बहुत  हैं और सर भी बहुत हैं,गोरों ने माना नहीं तो काले अंग्रेज क्या मानेंगे।


एक भी नागरिक उठकर खड़ा हो गया प्रतिरोध में तमाम परमाणु आयुध फेल हो जायेंगे।


गांधी के हत्यारे का मंदिर बनाने वाले लोगों ने इतिहास का यह सबक सीखा नहीं है।


दिल रो रहा है।

जख्मी और घायल बच्चे राजपथ पर अकेले हैं।

क्योंकि देश सो रहा है।

जनता सो रही है।


जागने वाले जो जाग रहे हैं,मुर्दों की आबादी में उनकी खबर किसी को नहीं है।


इस जागरण का मतलब बूझने का अदब भी बेअदबों की नहीं है।


दसों दिशाओं में बदलाव की असल सुनामी खड़ी हो रही है औ रवे समझते हैं कि किन्हीं लोगों का कत्ल काफी है और जालिमों के किलों को बचाने के लिए पुलिस या फौज का निजी सेना में तब्दील होना काफी है।


वक्त है कि वे दुनिया का इतिहास भी पढ़ लें।

कमसकम यह तो पढ़ लेंः



ये मुर्दो का ... साधो रे. S





बकौल कबीर-

साधो ये मुर्दों का गाँव

पीर मरे,पैगंबर मरी है

कबीर के इस पद का ख्याल कीजियो साथी,मुर्दों के इस गांव में तनिक चिनगारी की गुंजाइश है ,फिर देखते रहियो कि मुर्दे कैसे फिर जिंदा होवै, उठ खड़े हो अलख जगावै साधो!





पीर मरे, पैगम्बर मरी है मर गए ज़िंदा जोगी


राजा मरी


है, प्रजा मरी है मर गए बैद और



रोगी साधो रेये मुर्दो का गाँव ये मुर्दो का ... साधो रे. S


Sadho Re - Kabeer Bhajan - YouTube

साधो ये मुर्दों का गाँव पीर मरे,पैगंबर मरी है के लिए वीडियो▶ 6:01

https://www.youtube.com/watch?v=yrMdRS-w3DY

02/11/2014 - Devesh Mittal द्वारा अपलोड किया गया

Kabeer Bhajan ( Originally Sung by Agnee ) Lyrics साधो रे ये मुर्दोका गाँव ये मुर्दो का गाँव पीर मरे, पैगम्बर ...



ताजा खबरों के मुताबिक हैदराबाद केन्‍द्रीय विश्वविद्यालय में लगभग 15 दिन के अंतराल के बाद आज स्नातकोत्तर  कक्षाएं फिर शुरू हो गई हैं।


कहा जा रहा है कि कार्यकारी कुलपति पेरियासामी से रविवार शाम बातचीत के दौरान छात्रों की संयुक्‍त कार्य समिति कक्षाएं चलाने पर सहमत हुई।


इस खबर का मतलब यह कतई नहीं है कि रोहित वेलुमा को न्याय दिलाने की लड़ाई स्थगित हो गई है।


हालांकि, विद्यार्थियों का कहना है कि रोहित को न्‍याय दिलाने के लिए उनका प्रदर्शन कक्षाएं समाप्‍त होने के बाद शाम को जारी रहेगा।


समिति ने यह भी कहा कि अपनी मांगों पर जोर देने के लिए छात्रों द्वारा की जा रही भूख हड़ताल भी जारी रहेगी। इस बीच, भूख हड़ताल कर रहे तीन छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।


केंद्रीय विश्वविद्यालय के विद्यार्थी, शोध छात्र रोहित वेमुला की आत्त्महत्या के सिलसिले में कुलपति को हटाने और जिम्म्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।जिनमें केंद्र सरकारकी मनुस्मृति सबसे उजला चेहरा हैं। जो असुर विनाशाय देवी दुर्गा का अकाल बोधन कर चुकी हैं।


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रोहित वेमुला अगर एससी है तो भी ओबीसी और एसटी साथ है.. रोहित वेमुला अगर ओबीसी है तो भी एससी और एसटी साथ है.. रोहित वेमुला अगर एसटी है तो भी ओबीसी और एससी साथ है.. रोहित वेमुला अगर भारतीय है तो भी एससी,ओबीसी और एसटी साथ है.. प्रश्न ये उठता है कि रोहित बेमुला अगर एससी है तो हिन्दू है या नहीं? प्रश्न ये उठता है कि रोहित बेमुला अगर एसटी है तो हिन्दू है या नहीं? प्रश्न ये उठता है कि रोहित बेमुला अगर ओबीसी है तो हिन्दू है या नहीं? प्रश्न ये उठता है कि रोहित बेमुला अगर एससी और हिन्दू है तो बजरंग दल कहाँ है? प्रश्न ये उठता है कि रोहित बेमुला अगर ओबीसी और हिन्दू है तो RSS कहा है? प्रश्न ये उठता है कि रोहित बेमुला अगर एसटी और हिन्दू है तो भाजपा किधर है? ~Aalok Yadav


रोहित वेमुला अगर एससी है तो भी ओबीसी और एसटी साथ है.. 
रोहित वेमुला अगर ओबीसी है तो भी एससी और एसटी साथ है.. 
रोहित वेमुला अगर एसटी है तो भी ओबीसी और एससी साथ है.. 
रोहित वेमुला अगर भारतीय है तो भी एससी,ओबीसी और एसटी साथ है..

प्रश्न ये उठता है कि रोहित बेमुला अगर एससी है तो हिन्दू है या नहीं?
प्रश्न ये उठता है कि रोहित बेमुला अगर एसटी है तो हिन्दू है या नहीं?
प्रश्न ये उठता है कि रोहित बेमुला अगर ओबीसी है तो हिन्दू है या नहीं?

प्रश्न ये उठता है कि रोहित बेमुला अगर एससी और हिन्दू है तो बजरंग दल कहाँ है? 
प्रश्न ये उठता है कि रोहित बेमुला अगर ओबीसी और हिन्दू है तो RSS कहा है? 
प्रश्न ये उठता है कि रोहित बेमुला अगर एसटी और हिन्दू है तो भाजपा किधर है?
~Aalok Yadav

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মহাপ্রাণ যোগেন্দ্রনাথ মন্ডলের জীবন ও কর্ম

মহাপ্রাণ যোগেন্দ্রনাথ মন্ডলের জীবন ও কর্ম


Jagadish Roy


জন্ম ও শিক্ষাঃ- যোগেন্দ্রনাথ মন্ডল জন্মগ্রহণ করেন বর্তমান বাংলাদেশের বরিশাল জেলার গৌরনদী থানাধীন মৈস্তাকান্দি গ্রামের একদরিদ্র নমঃ পরিবারে, 1904 সালের 29 শে January. পিতা-রামদয়াল মন্ডল ও মাতা –সন্ধ্যারাণী মন্ডল। তিনি ছিলেন ৬ষ্ঠ ও সর্বকিনিশঠ সন্তান। তিনি বাল্যকালে খুবই দুরন্ত ছিলেন। আর বছর পর্যন্ত তাঁকে বিদ্যালয়ে পাঠানো সম্ভব হয়নি। একটু বেশী বয়সে লেখাপড়া শুরু করলেও তিনি ছিলেন অসাধারণ মেধাবী। অল্পকালের মধ্যেই পাঠশালার পাঠ সমাপ্ত করে চতুর্থ শ্রেণীতে ভর্তি হন। 1924 সালে প্রথম বিভাগে প্রবেশিকা পরীক্ষায় উত্তীর্ণ হন। 
যোগেন্দ্রনাথের পিতার আর্থিক অসচ্ছলতার জন্য তিনি তাঁকে কলেজে পড়াতে অসমর্থ হলে যোগেন্দ্রনাথের কাকা কলেজের খরচা বহন করেন, আর বরিশালের বি.এম. কলেজে ভর্তি হন এবং 1926 সালে কৃতিত্বের সহিত I.A. পাশ করেন। পড়াশুনা চালিয়ে যাওয়ার জন্য আর্থিক সাহায্য পাওয়ার জন্য তিনি ওখানকার নিবাসী প্রহ্লাদ চন্দ্র বাড়ৈ-এর দ্বিতীয় কন্যা কমলা বাড়ৈকে বিবাহ করেন। তারপর 1929 সালে ঐ কলেজ থেকে তিনি অঙ্ক ও সংস্কৃতে বিশেষ কৃতিত্বের সঙ্গে B.A. পাশ করেন।
তিনি M.A. পড়তে চাওয়ার কথা জানালে শ্বশুর মহাশয়ের তাঁর অসামর্থের কথা জানান। তখন যোগেন্দ্রনাথ মাত্র 11 টাকা সম্বল করে উচ্চ শিক্ষা লাভের জন্য ঢাকা যান। ঢাকায় পড়াশুনা না করতে পেরে তিনি কলকাতায় এসে কলকাতা বিশ্ববিদ্যালয়ের আইন কলেজে ভর্তি হন এবং চাঁদসী চিকিৎসক প্যারীমোহন দাসের বাড়িতে লজিং থেকে ছাত্র পড়িয়ে নিজের পড়ার খরচ জোগাড় করেন।এছাড়া পড়াশুনার ব্যয় নির্বাহের জন্য তিনি ছাপাখানায় প্রুফ সংশোধনের কাজ করতেন। 1934 সালের জুলাই মাসে তিনি সসম্মানে আইন পরীক্ষায় উত্তীর্ণ হন। 1936 সালের 25শে জুলাই আইনজীবি হসাবে বরিশাল সদর আদালতে যোগদান করেন। এই সময় তিনি দরিদ্র কৃষকদের অনেক মমলা কোনরূপ ফি না নিয়েই করে দেন। 
1937 সালের সাধারণ নির্বাচনে নির্দল প্রার্থী হিসাবে তিনি বাখরগঞ্জ উত্তর-পূর্ব নির্বাচন কেন্দ্র থেকে কংগ্রসী প্রার্থী জমিদার সরল দত্তকে বিপুর ভোটের ব্যবধানে পরাজিত করে বঙ্গীয় আইন সভার সদস্য নির্বাচিত হন।

স্কুল ও কলেজ জীবনে বর্ণবৈষ্যম্যের স্বীকারঃ-
(১) একদিন ক্লাশে এক ব্রাহ্মণ ছাত্রের পাশে যোগেন্দ্রনাথ বসলে, সেই দাম্ভিক ব্রাহ্মণ কুমার ঘৃণায় ভ্রুকুঞ্চিত করে তীব্র শ্লেষোক্তি করে, "এই নমঃর স্পর্ধা দেখছ; ও কিনা আমার পাশে এসে, গায়ে গা ঘেঁসে বসতে চায়!" বর্ণ হিন্দু ছাত্ররা একত্রে তার কথা সমর্থন করে বলে, "ঠিক বলেছিস, ওকে এখান থেকে সরিয়ে দাও।" সকলে মিলে যখন তাঁকে সরানোর জন্য প্রস্তুত হচ্ছিল, তখন তিনি আর স্থির থাকতে পারলেন না, তিনি দৃঢ় কন্ঠে প্রতিবাদ করে বললেন, "আমি এখান থেকে এক চুলও নড়ব না । এ স্কুল শুধু তোমাদের জন্য নয়। এখানে সরাবই বসার অধিকার আছে।" কিশোর যোগেন্দ্রনাথ তখন থেকে এই রূঢ় সত্যকে হৃদয়ঙ্গম করতে সমর্থ হলেন।

(২)কলকাতার ব্রজমোহন কলেজে সরস্বতী পূজায় তফসিলী ছাত্রদের পূজাগৃহের বাইরে দাঁড়িয়ে পুষ্পাঞ্জলি দিতে হ'ত, যেটা সুদীর্ঘকাল ধরে চলছিল। যোগেন্দ্রনাথ এই বৈষ্যম্যের প্রতিবাদ করেন। তিনি একত্রে পুষ্পঞ্জালি দেওয়ার কথা বললে, বর্ণ হিন্দু ছাত্ররা তফসিলী ছাত্রদের সঙ্গে একত্রে পুষ্পাঞ্জলি দিতে রাজি হয় না। এই নিয়ে তিব্র বাক বিতন্ডা হয়। তখন দৃঢ়চেতা যোগেন্দ্রনাথ অনুন্নত শ্রেণীর ছাত্রদের নিয়ে ঐ কলেজের অন্যত্র পৃথক পূজার বন্দোবস্ত করেন।

(৩)একবার যোগেন্দ্রনাথের একজন কলেজের বন্ধু বরিশাল শহরে কালীবাড়ীর নাট মন্দিরে প্রবেশ করে দেবীর আরাধনা করলে কিছু সংখ্যক উচ্চবর্ণের হিন্দুদের প্ররোচনায় তাকে যথেষ্ঠ নিগ্রহ ভোগ করতে হয়। তাকে নির্মমভাবে প্রহার করা হয়। এই ঘটনার কথা সেই ছাত্র বন্ধুটি যোগেন্দ্রনাথকে জানালে, তিনি ক্ষোভে, দুক্ষে ফেটে পড়েন। তিনি ঐ দুষ্কৃতিদের বিরুদ্ধে প্রতিবাদেরান্দোলন করেন। সারা শহর জুড়ে একটা হুলস্থুল সাড়া পড়ে যায়। স্থানীয় নেতৃত্ববৃন্দও চিন্তিত হন। এই উপলক্ষে অনুন্নত সম্প্রদায়ের এক বিরাট সভার আয়োজন করা হয়। সেই সভায় যোগেন্দ্রনাথকে দলপতি বানানো হয়। সেই সভায় তীব্রভাবে ঐ অত্যাচারের নিন্দা করা হয়। তিনি দৃঢ় কন্ঠে সমস্ত বর্ণ হিন্দুদেরকে বলেদেন যে, অনুন্নত সম্প্রদায়ও মানুষের মর্যাদা দাবি করে এবং সেই দাবি রক্ষার জন্য তারা প্রাণ পর্যন্ত উৎসর্গ করতে দ্রঢ় প্রতিজ্ঞাবদ্ধ। অনুন্নত সম্প্রদায়ের মানুষের আজ সাধারণ নাগরিকের অধিকার থেকে বঞ্চিত, অবনমিত, লাঞ্ছিত ও বিপর্যস্ত। তাই এই প্রতিকার অবশ্যই করতে হবে। 
তখন বিষয়টির গুরুত্ব বুঝতে পেরে নেতৃবৃন্দ এই সমস্যার একটা সন্তোষজনক মীমাংসার ব্যবস্থা করতে বাধ্য হন। এর পরে এই ধরণের ঘটনা যাতে আর না ঘটে তার জন্য নেতৃবৃন্দ বিশেষ ব্যবস্থা গ্রহন করেন।

সমাজ কল্যানমূলক কাজঃ- তিনি আইনপাশ করে আইনজীবি হিসাবে দরিদ্র কৃষকদের অনেক মামলা বিনা পয়সায় করে দিতেন। M.L.A. হিসাবে তিনি নমঃ-অধ্যূষিত আগৈলঝাড়া গ্রামের ভেগাই হালদার পাবলিক একাডেমিকে উচ্চ ইংরেজি বিদ্যালয়ে উন্নীত করেন। উত্ত্র বরিশালের বিভিন্ন বিলের জল নিষ্কাশন, কলকাতায় তফসিলী জাতিভুক্ত পুলিশ কনস্টেবলদের আবাসস্থলের নির্মাণ, তফসিলী ছাত্রদের ৭তম শ্রেণীর পরিবর্তে ৪তুর্থ শ্রেণী থেকে বৃত্তি প্রদান, মফঃস্বল শহরের ছাত্রাবাসগুলিতে তফসিলী ছাত্রদের আসন সংরক্ষণ এবং উক্ত ছাত্রদের জন্য সরকারী অনুদানের ব্যবস্থা করেন

যোগেন্দ্রনাথ মন্ডল সম্পর্কে বিভিন্ন বিদ্যজনের মতামতঃ- 
ডঃ সঞ্জয় গাজভিয়েঃ- সাংবিধানিক ভারতের নির্মাতা বাবাসাহেব ডঃ আম্বেদকর ও মহাপ্রাণ যোগেন্দ্রনাথ মন্ডল।
ডঃ প্রদীপ আগলাবেঃ- বাবাসাহেব ডঃ আম্বেদকর সামাজিক রাজনৈতিক শৈক্ষনিক ধার্মিক ইত্যাদি সব ক্ষেত্রে যে পরিবর্তন আনার জন্য ঐতিহাসিক আর ক্রান্তিকারী কাজ করেছেন; সেই মহান ক্রান্তিকারী কাজ করার জন্য যে মহামানব বাবাসাহেবকে সহযোগীতা করেছেন, সেই মহাপ্রাণ যোগেন্দ্রনাথ মন্ডলের আবদান খুব মহত্ত্বপূর্ণ । যদি মহাপ্রাণ যোগেন্দ্রনাথ মন্ডলের এই সহযোগীতা বাবাসাহেব না পেতেন, তাহলে তিনি সংবিধান তৈরী করতে পারতেন না । ঐতিহাসিক সত্য ।
ডঃ প্রদীপ আগলাবেঃ- বাবাসাহেব যদি সংবিধান সভায় যেতে না পারতেন তাহলে এই দেশের সংবিধান ব্রাহ্মণদের পক্ষেই লেখা হ'ত । তাই যোগেন্দ্রনাথ মন্ডল আম্বেদকরী আন্দোলনে যে সহযোগীতা করেছেন এবং মূলনিবাসীদের উদ্ধারের জন্য যে কাজ করেছেন সেটা অসাধারণ কাজ
ঊষাপ্রসন্ন মুখোপাধ্যায়ঃ- ভারতীয় রাজনীতির ইতিহাসে যোগেন্দ্রনাথ মন্ডলের স্থান সম্পর্কে নানা সনের মনে যে বিভ্রান্তি বা সংশয় দেখা যায় সেটা বহুলাংশে অজ্ঞতার কারণে। তাঁকে দেশ বিভাগের জন্যেও অংশতঃ দায়ী করা হয়। অথচ তাঁরমত কর্মযোগী দেশবৎসল, স্ব-সম্প্রদায়ের উন্নয়নে নিবেদিত প্রাণ নেতা ভারতীয় রাজনীতির ইতিহাসে কমই দেখা গেছে।
কিরণ চন্দ্র ব্রহ্মঃ- ভারত স্বাধীন হওয়ার পরেই চারিদিক হতে একটা চিৎকার প্রতিধ্বনিত হল যে যোগেন্দ্রনাথ মন্ডল দেশ ভাগ করেছেন, তাঁর মত সর্বনাশা লোক ভারতে আর কেউ নেই। এই মিথ্যা দোষারোপকারীরা অশ্লীল ভাষায় তাঁকে অজস্র গাল দিয়েছে। প্রকৃত পক্ষে ভারত ভাগে তাঁর কোন ভূমিকা ছিল না। তবে এই কুৎসা রটনাকারীদের উদ্দেশ্য কি তাও প্রনিধান করা করা দরকার। যারা এই মিথ্যা রটিয়েছে তারাও জানে ভারত ভাগে যোগেন্দরনাথের কোন ভূমিকাই ছিল না এবং তিনি দেশ ভাগের একান্ত বিরোধী ছিলেন। এই কুৎসা রটনার কারণ আমাদের কাছে মোটেই দুর্বোধ্য নয়। কারণ, এই দেশের নিপীড়িত মানুষের অন্তরে মহাপ্রাণ যে শ্রদ্ধা অর্জন করেছেন সেটাকে নষ্ট করে দিয়ে সাধারণ মানুষের অন্তর থেকে তাঁকে চিরতরে মুছে দিতে৩ পারলে তাঁর আজীবন সংগ্রামকে ব্যর্থ করে দেওয়া যায়। এই ছিল কুৎসা রটনাকারীদের মূল উদ্দেশ্য।

বাংলা বিভাজনের পক্ষে কংগ্রেস আর উচ্চবর্নীয়রা কেন ছিল সেটা জানা খুব দরকার । 
প্রথমকারনঃ- বাংলা প্রান্তে মুসলিম এবং পিছিয়ে পড়া শ্রেনীর(বিশেষ করে নমঃশুদ্র) লোকদের সংখ্যা সর্বাধিক ছিল । সেখানে মুসলিম লীগের সরকার ছিল। যদি বাংলার বিভাজন না হয় তাহলে মুসলিম আর পিছিয়ে পড়া শ্রেনীর সত্তা চিরস্থায়ী হবে। সেখানে উচ্চবর্ণীয়দের কোন অধিকার থাকবে না । 
দ্বিতীয় কারনঃ- বাংলার খুলনা, যশোর, ফরিদপুর, বরিশাল এই এলাকা থেকে বাবা সাহেবকে নির্বাচিত করে সংবিধান সভায় পাঠানো হয় । তাই বাংলা বিভাজন করে বাবাসাহেব যে ক্ষেত্র থেকে নির্বাচিত হয়েছিলেন সেখান থেকে বাবাসাহেবের সদস্য পদ খারিজ করার উদ্দেশ্যে বাংলা ভাগ করে ছিল । 
তৃতীয়কারনঃ- যে নমঃ(শুদ্র)রা বাবাসাহেবকে সংবিধান সভায় নির্বাচিত করে পাঠিয়েছেলেন তাদেরকে সাজা দেওয়ার জন্য যাতে তারা আজীবন মুসলমানদের আধীন থাকে, এই শিক্ষা দেওয়ার জন্য বাংলা ভাগ করেছিল ।

Jagadish Roy's photo.

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PROFESSOR RANDHIR SINGH IS NO MORE.

PROFESSOR RANDHIR SINGH IS NO MORE.

Shamsul Islam

Professor Randhir Singh a legendary teacher, Marxist thinker, activist died on January 31, 2016. With his death a glorious era of pro- people intellectual discourse and creativity comes to end. He inspired many generations of intellectuals and students who will keep his heritage alive. He will live for ever through his writings, lectures and advices. He remained an atheist in the true tradition of revolutionaries like Bhagat Singh.
Last two years were very difficult for him physically. Her daughter Professor Priyaleen Singh saw to this that suffering remain minimized.
TO BID HIM GOOD-BYE LAST TIME REACH LODHI ELECTRIC CREMATORIUM NEW DELHI AT 5 PM ON FEBRUARY 1, 2016.
S. Islam

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Make harassment and discrimination crimes under the law: Prakash Ambedkar

INTERVIEW

Make harassment and discrimination crimes under the law: Prakash Ambedkar

Amendments in the Central University law as well as all the statutue(s) under which Central Universities have been established, to ensure that discrimination and harassment are defined crimes punishable under the Indian Penal Code are urgently required, says Prakash Amdedkar, in an interview to Teesta Setalvad.

Prakash Yashwant Ambedkar, grandson of Dr Babasaheb Ambedkar, formerly a Member of Parliament, heads the Bharipa Bahujan Mahasangh and is leading a protest march of student and mass organizations, in Mumbai on February 1, 2016. He says that Rohith Vemula's suicide –defined by the student movement across India as an institutional murder – has fired the imagination of youth all over India. The march in Mumbai will be from Rani Bagh, Byculla to Vidhan Bhavan.

Q. What are the main demands that you are making tomorrow?
A. We are demanding the immediate suspension of the Vice Chancellor, Appa Rao for his actions that amount to culpability especially if you see both letters written by Rohoth Vemula to him, one dated December 18. 2016 and the other the day he died, January 17, 2016. Prima facie this is evident, he needs to be suspended. Second, we are demanding a free and fair criminal investigation especially looking into the aspect of whether the actions of two ministers of the central government amount to abetment to suicide.
Thirdly, we are demanding substantive amendments to the laws governing Universities, the general Central University Act and the various University Act(s) under which these Central Universities have been constituted (for example the University of Hyderabad Act-HCU, 1974, the Jawaharlal Nehru Act, 1966, the North-Eastern Hill University Act, 1973 etc) and the Indian Penal Code (IPC). The former laws need to be amended to actually reflect the offences that constitute discrimination, harassment and unprofessional conduct. For this, a detailed and extensive survey that jots down the forms and kinds of discriminatory conduct needs to be undertaken before they are defined in the newly amended law.......


Background
The Mumbai Students Solidarity Front (MSS) first organised the student protest in Mumbai University on January 19, 2016 demanding justice for Rohith and the other four students who were thrown out of their hostels on false allegations made by the ABVP president of HCU, Susheel Kumar. After the protest a need for a broader alliance was felt. Various Ambedkarite, progressive and democratic organisations from Mumbai, Thane and Navi Mumbai came together and formed a front on called "Justice for Rohith - Joint Action Committee, Mumbai" under the guidance of  Prakash Ambedkar (January 22, 2016).

Students from IIT-Bombay, Mumbai University, Tata Institute of Social Sciences, Tata Institute of Fundamental Research, Nirmala Niketan, Siddharth College, Govt Law College, Ruparel College, St. Xavier's college, International Institute of Population Sciences, Vivekananda College, Ambedkar College, and many others are part of the front. Several progressive political forces, cultural groups and local organisations have also joined in.

It is this front that, in order to take the movement of Justice for Rohith forward and build support for the demands raised by the JAC for Social Justice, HCU, the JAC Mumbai is organizing a protest rally from Byculla to Vidhan Bhavan onFebruary 1, 2016 starting at 11 am. JAC members have campaigned across educational institutions and bastis in the city and suburbs to speak to people of the age-old and recent battles that Rohit was fighting and to call upon them to join the protest rally.  


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पुत्रजीवक बीज की जांच रिपोर्ट योग गुरु रामदेव के खिलाफ! सामाजिक न्याय और समता सहिष्णुता के झंडेवरदार बतावें क्या राजर्षि के लिए कानून कानून के रास्ते पर चलेगा?


पुत्रजीवक बीज की जांच रिपोर्ट योग गुरु रामदेव के खिलाफ!

सामाजिक न्याय और समता सहिष्णुता के झंडेवरदार बतावें क्या राजर्षि के लिए कानून कानून के रास्ते पर चलेगा?
पलाश विश्वास

हर चीज खाने पीने की अब पतंजलि है।गर्भ परीक्षण पर कानूनी प्रतिबंध है और पुत्र या पुत्री का विकल्प चुनना अपराध है।सजा का प्रावधान है।मगर राजर्षि बाबा रामदेव का ग्लोबल हिंदुत्व का योगाभ्यास समस कानून और देश के संविदान से ऊपर है।जिनने हाय तौबा मचाना था,मचा लिया।बाबा रामदेव और पतंजलि समूह पर कारपोरेट लाबी का भी कोई बस नहीं है।पुत्र जीवक पर कोई रोक नहीं है।जब रोक ही नहीं है तो इस जांच पड़ताल और रपट से मूर्ख किसे बनाना मकसद है?
अब समझ लीजिये कि हल्ला है,विवादास्पद आयुर्वेदिक दवा "पुत्रजीवक बीज" की जांच के लिए गठित समिति की जांच रिपोर्ट योग गुरु बाबा रामदेव की मुश्किल बढ़ा सकती है। उत्तराखंड सरकार द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट बाबा रामदेव के खिलाफ बताई गई है।

 गौरतलब है कियोग गुरु रामदेव की फार्मेसी की दवा "पुत्रजीवक बीज" की जांच के लिए उत्तराखंड सरकार ने पिछले साल तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। "पुत्रजीवक बीज" के बारे में प्रचारित किया जाता रहा है कि इसके सेवन से पुत्र होगा। जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री हरीश रावत को भेज दी गई है।उनकी अनुशंसा के बाद रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी जाएगी। उत्तराखंड के प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ओम प्रकाश ने बताया है- "आयुर्वेदिक दवा पुत्रजीवक बीज की जांच रिपोर्ट रामदेव के पक्ष में नहीं है।" पुत्रजीवक बीज को लेकर विवाद पिछले साल 1 मई को खड़ा हो गया था जब राज्यसभा सदस्य केसी त्यागी के नेतृत्व में जदयू ने तत्काल प्रतिबंध की मांग करते हुए निर्माताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।

अब समझ लें कि इसके बाद केंद्र सरकार ने उत्तराखंड सरकार को मामले की जांच कराने का निर्देश दिया था। दूसरी ओर बाबा रामदेव ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि दवा महिलाओं में बांझपन के इलाज में मददगार है। पुत्र प्राप्ति की बात गलत और भ्रामक है।

क्या कर लेंगे हरीश रावत और का एक्शन लेंगे हिंदू ह्रदय सम्राट?
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प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने बताया कि पहले आयुष औषधि नियंत्रक पीडी चमोली ने अपनी जांच में बाबा रामदेव को क्लीनचिट दे दी थी। कहा था कि दवा का नाम प्राचीन आयुर्वेदिक पुस्तकों और साहित्य पर आधारित है। लेकिन चमोली की जांच रिपोर्ट के बाद उत्तराखंड सरकार ने स्वास्थ्य महानिदेशक और विधि विभाग को मामले की जांच करने के लिए कहा था। इसकी जांच रिपोर्ट बाबा रामदेव के खिलाफ गई है।

जल्द गठित होगा वैदिक शिक्षा बोर्ड: रामदेव

योग गुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि गुरुकुल शिक्षा के लिए केंद्र सरकार इसी वर्ष वैदिक बोर्ड का गठन कर देगी। इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तीन दौर की वार्ता हो चुकी है। गायों का सम्मान बढ़ाने के लिए पतंजलि योगपीठ द्वारा देश में राष्ट्रीय स्तर की चार आदर्श गोशालाएं खोलने की भी उन्होंने घोषणा की।

स्वामी रामदेव यहां कालवा गुरुकुल में अपने गुरु आचार्य बलदेव की श्रद्धांजलि सभा को संबोधित कर रहे थे। सभा में हिमाचल के राज्यपाल आचार्य देवव्रत समेत कई विशिष्ट अतिथियों ने आचार्य बलदेव के संकल्पों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। रामदेव ने कहा कि आजकल विवाद के लिए देश में नए-नए आडंबरों का सहारा लिया जा रहा है।

आकार में पृथ्वी से बड़े शनि देव की जिस परछाई से भी लोग दूर भागने का प्रयास करते हैं, उसकी पूजा को लेकर नया विवाद शुरू किया जा रहा है। पिछले दिन चार दिनों से इसकी खूब चर्चा हो रही है। मुझसे भी ईश्वर के बारे में सवाल पूछे जाते हैं। मेरा एक ही जवाब होता है, जो न कभी पैदा होता है तथा न कभी मरता है वही ईश्वर है।

देश में फिलहाल 13 करोड़ गाय हैं, जिनमें नौ करोड़ देसी तथा चार करोड़ संकर नस्ल की हैं। सरकार के साथ मिलकर उन्नत किस्म की नस्ल तैयार की जा रही है, ताकि देश में गायों को किसी का सहारा लेने की जरूरत न पड़े और वह खुद दूसरों को सहारा दे।


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Sunday, January 31, 2016

#justicetorohitHOKKOLOROB মৃতের সহিত কথোপকথন,যদি কারো দেহে ফেরে পরাণ! সেই অন্ধ্রেই রোহিত সুনামি রুখিতে সংরক্ষণ ব্রহ্মাস্ত্র! জাতের নামে বজ্জাতিশাসকের রাজনীতিমনুস্মৃতি! মৃতেরা কি পদাতিক হয়ে ফিরিবে মিছিলে আবার? মোদির মনের কথায় নেই রোহিত! Manusmriti plays the ObC Card to sustain the Apartheid regime,media tuned accordingly!



#justicetorohitHOKKOLOROB

মৃতের সহিত কথোপকথন,যদি কারো দেহে ফেরে পরাণ!

সেই অন্ধ্রেই রোহিত সুনামি রুখিতে সংরক্ষণ ব্রহ্মাস্ত্র!

জাতের নামে বজ্জাতিশাসকের রাজনীতিমনুস্মৃতি!

মৃতেরা কি পদাতিক হয়ে ফিরিবে মিছিলে আবার?

মোদির মনের কথায় নেই রোহিত!

Manusmriti plays the ObC Card to sustain the Apartheid regime,media tuned accordingly!


পলাশ বিশ্বাস

বাংলার দলিতেরা জাগতাছে আবার।উদ্বাস্তু হওনের পর মরণঘুমে যেতনার উন্মেষ অবরুদ্ধ চিল এতকাল।সিংহভাগ দলিতেরা পার্টিশান প্রকল্পে ইতিহাস ভূগোলের বাইরে ,মাতৃভাষা বন্চিত ছড়িয়ে ছিটিয়ে ভারতবর্ষের আদিবাসী অধ্যুষিত অরণেযমহারণ্যে দন্ডকারণ্যে, নৈনীতালে দীপান্তরে আন্দামানে।


এক কোটি মানুষ স্বজন রহিয়াছে সীমান্তের ওপারে।


এপারে যারা আজ তারা অবান্ছিত,বেনাগরিক,নাগরিকত্বের বাহিরে গেরুয়া ললিপপ ভক্ষনে জীবন যাপন অথবা রাজ্যে রাজ্যে ক্ষমতার রাজনীতিতে দলদাস হইয়া মৃতের জীবন যাপন।


বাংলার মূল ভূখন্ডে ইহাই আদি অকৃত্তিম সত্য।বার্মাব দেবী দুর্গার অকাল বোধন অসুর বিনাশায়,মারা যারা যায় তাহাদের পরিচয় ব্রাত্য,জাতিহারা ,মন্ত্রহীন।কোমলগান্ধার।


কার সহিত কাহার কিসের মেল বন্ধন,কাহার সহিত কাহার নির্বাচনী বোঝাপড়া,জোট এবং অবশেষে ভোট,এই বৃত্তে হারিয়ে চেতনার উন্মেষ।


মৃতের সহিত কথোপকথন,যদি কারো দেহে ফেরে পরাণ!

সেই অন্ধ্রেই রোহিত সুনামি রুখিতে সংরক্ষণ ব্রহ্মাস্ত্র!

জাতের নামে বজ্জাতি,শাসকের রাজনীতি,মনুস্মৃতি!

মৃতেরা কি পদাতিক হয়ে ফিরিবে মিছিলেঃআবার?


সংবাদে প্রকাশঃঅশান্তির ভ্রুকুটিকে মাথায় নিয়েই ধীরে ধীরে স্বাভাবিক হচ্ছে অন্ধ্রপ্রদেশ।


সংরক্ষণের দাবিতে কাপু সম্প্রদায়ের বিক্ষোভে গতকাল রণক্ষেত্রের চেহারা নেয় অন্ধ্রের তুনি শহর। কয়েকঘণ্টার মধ্যেই গোটা পূর্ব গোদাবরী জেলায় ছড়িয়ে পড়ে বিক্ষোভের আগুন। রত্নাচল এক্সপ্রেসে আগুন ধরিয়ে দেন বিক্ষোভকারীরা।


অশান্তির ভ্রুকুটি,সন্ত্রাস,মনুষত্বের বলি,জাতের নামে বজ্জাতি,সে কামদুনি থেকে কাকদ্বীপ ধর্ষণ সুনামিতে বোঝা না হইলে বোঝার নয়।


মুক্তবাজারের অশ্লীল উল্লাস,বইমেলায় যৌন আবেদন,শ্রেণীবদ্ধ সঙ্গিনী,শিরোনামে রকেট,পাতাভর্তি জাপানী তেল,নির্লজ্জ শিত্কার।


কোথাও কোনো চিত্কারের প্রতিধ্বনি নেই সাবআরবন সীমেন্চের জঙ্গলে তব্দীল সোনার বাংলায়,শিকড়হীন মুখের মুখোশে মৃতেরা।



মৃতের সহিত কথোপকথন,যদি কারো দেহে ফেরে পরাণ!

সেই অন্ধ্রেই রোহিত সুনামি রুখিতে সংরক্ষণ ব্রহ্মাস্ত্র!

জাতের নামে বজ্জাতি,শাসকের রাজনীতি,মনুস্মৃতি!

মৃতেরা কি পদাতিক হয়ে ফিরিবে মিছিলেঃআবার?


অন্ধ্রের সংরক্ষণ আন্দোলন কাপু সম্প্রদায় দক্ষিণাত্যের সবচেয়ে সম্পন্ন গোষ্ঠি।গুজরাতের পটেল,উত্তর প্রদেশের জাট,রাজস্থানের গুজ্জর যেমন আন্দোলনে কাপুরাও সংরক্ষণের দাবিতে সোচ্চার রোহিত সময়ে,যখন সারা দেশে জাতের বজ্জাতির বাইরে মানববন্ধন।কাকতলীয়।


বাংলার বুকে সারা দেশে ব্রাত্য মনুস্মৃতির রণহুন্কার,তামাশা। মা দুর্গার ভক্তরা দেখিয়া লইবেন।যাদবপুরে ,প্রেসীডেন্সি ও আইআইচি খড়গপুরে যখন মশালে মশালে অন্ধকারের বিরুদ্ধে লড়াই,তখন মৃতেরা বজরঙ্গী গেরুয়া গেরুয়া গাহিতে গাহিতে কেশব ভবনের বাইরে রোহিতের জন্য ন্যায়ের দাবিতে বিক্ষাভকারি ছাত্রদের রাম ক্যালানো কেলাইয়াছে।


ধর্মনিরপেক্ষ জেহাদি শাসকের পুলিশ খাড়াইয়া দেখিল এবং বামের ঘুরিযা দাঁড়াইলো না,তাহার যুতসই জোটের ফন্দি আটতাছেন, পক্ককেশ বৃদ্ধদের রুনী ভার্যা এই বাম ধর্মনিরপেক্ষতা,সামলানো দায়।


ইতিপূর্বে,সায়েন্স সিটিতেও ছাত্রেরা ঠ্যাঙানি খাইছে।তাহাদের কপালে যত রাজ্যের রামছাগল।শিক্ষার বারোটা বাজছে পিপিপি উন্নয়নে সাইকেল শুধু সাথী,মওকা পাইলে ক্লাবের জন্যখয়রাত অথবা শীতের কম্বল অথবা জূতো একজোড়া, অবশেষে বেকার ভাতা।অথবা গ্রীন পুলিশ।সেল্সম্যান।


পাড়ায় পাড়ায় দোকান রং বেরং ডিগ্রী নানারকম ওবং অবশেষে চাপরাসি কিংবা প্রাথমিক কিংবা রেলওয়ে ভর্তি পরীক্ষায় লাখো লাখ পরীক্ষার্থী-তারপর রুজু রুচির প্রয়োজনে সারা দেশে দেশাটন।


এই সব মৃতেরা টাটকা টাটকা মৃত।


অতএব রাজধানী দিল্লীতে আরএসএস সদরে দেশজোড়া গণসংগঠনের রাজপথে বিশাল মিছিলের পূর্বসন্ধ্যায় আবার মৃতেরা গেরুয়া গেরুয়া গাহিতে গাহিতে ফিরিয়া আসিয়া কেশব ভবনের মত বা সায়েন্স সিটির মত বিক্ষোভকারি ছাত্রদের রামক্যালানো ক্যালাইল,সেখানেও সরকার কিম্বা পুলিশ কিম্বা প্রশাসন নির্বাক দর্শক।


থীমসঙ মনুস্মৃতির রোহিত আদৌ দলিত নয়,না জানি কোন কাঁচকলা এফেযার্স মিনিস্টার ও কাল মিহিদানার মত কহিলেন,রোহিত দলিত নয় আদৌ।


ন্যায় অন্যায়,সত্য অসত্য বিবেচ্য নয়,জাতের নামে বজ্জাতি।


বজর্ং বাহিনীর তালপাতার সেপাহ সালারেরা এক একে হুন্কার দিতেছেন বড়- তাহারা দেশদ্রোহী,হিন্দুদ্রোহী,আহা।


মৃতের সহিত কথোপকথন,যদি কারো দেহে ফেরে পরাণ!

সেই অন্ধ্রেই রোহিত সুনামি রুখিতে সংরক্ষণ ব্রহ্মাস্ত্র!

জাতের নামে বজ্জাতি,শাসকের রাজনীতি,মনুস্মৃতি!

মৃতেরা কি পদাতিক হয়ে ফিরিবে মিছিলেঃআবার?


মোদির মনের কথায় নেই রোহিত!

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আজকালের প্রতিবেদনে রাজীব চক্রবর্তী: বছরের প্রথম 'মন কি বাত' অনুষ্ঠানে কৃষক ও যুব সমাজের দুর্দশা লাঘবের কথা বললেন প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদি৷ খাদির ব্যবহার বাড়ানো, কৃষি বিমার সুযোগ নেওয়া— নানা প্রসঙ্গেই তাঁর মনের কথা বলে গেছেন মোদি তাঁর মাসিক রেডিও অনুষ্ঠানটিতে। অবশ্যই তাতে ছিল না হায়দরাবাদ বিশ্ববিদ্যালয়ের গবেষক–ছাত্র রোহিত ভেমুলার আত্মহত্যা এবং দলিত অসন্তোষের প্রসঙ্গ। এই নিয়ে তাঁকে ঠুকেছে কংগ্রেস। দলের অন্যতম মুখপাত্র আনন্দ শর্মা বলেন, বিষয়টি তাঁকে যদি সত্যিই স্পর্শ করত তা হলে মন্ত্রী স্মৃতি ইরানি, বন্ডারু দত্তাত্রেয়র বিরুদ্ধে ব্যবস্থা নিতেন। ক্ষতস্থানে নুনের ছিটে দেওয়ার মতো বি জে পি এখন রোহিতের চরিত্র হননে নেমেছে। বি জে পি–র যশোবন্ত সিনহাকে উদ্ধৃত করে কংগ্রেস নেতা বলেন, মোদি আসলে সংলাপে বিশ্বাস করেন না, শুধু নিজের কথা বলতেই ভালবাসেন। মোদি এদিন মন কি বাত অনুষ্ঠানে খাদি বস্ত্র ব্যবহারে জোর দিয়ে অতিরিক্ত ১৮ লাখ মানুষের কর্মসংস্থানে জোয়ার আনার আর্জি জানান। সর্দার প্যাটেলকে উদ্ধৃত করে তিনি বলেন, 'দেশের স্বাধীনতা খাদির মধ্যেই নিমজ্জিত৷' সম্প্রতি কেন্দ্রীয় কৃষি মন্ত্রকের প্রচেষ্টায় নতুন কৃষি বিমা চালু হয়েছে৷ সেই বিষয়েও দেশবাসীর দৃষ্টি আকর্ষণ করেন মোদি৷ দেশের অর্ধেক কৃষককে প্রধানমন্ত্রী কৃষি বিমা যোজনার অন্তর্ভুক্ত হওয়ার ডাক দেন। ব্যাখ্যা করেন, কীভাবে রবি ফসলে কৃষি বিমার মাত্র ১.৫ শতাংশ এবং খারিফ ফসলের ক্ষেত্রে মাত্র ২ শতাংশ প্রিমিয়াম দিয়ে প্রাকৃতিক বিপর্যয়ে কৃষক তাঁর ফসলের বিমা সুরক্ষার সুবিধা পেতে পারেন৷ জানুয়ারির গোড়ায় 'প্রারম্ভ ভারত' প্রচার অভিযানে যুব সম্প্রদায়ের বিপুল অংশগ্রহণ অবাক করে দিয়েছে প্রধানন্ত্রীকে৷ মোদি বলেন, 'প্রারম্ভ ভারত অভিযান একটা ভ্রান্ত ধারণা ভেঙে দিয়েছে৷ সবার ধারণা ছিল প্রারম্ভ ভারত বোধ হয় শুধুমাত্র তথ্যপ্রযুক্তি বিষয়ের কোনও অভিযান৷ তথ্যপ্রযুক্তি একটি ছোট অংশ৷ প্রারম্ভ ভারত বহু ক্ষেত্রে সুযোগের সূচনা৷' হরিয়ানা ও গুজরাটে সাধারণতন্ত্র দিবস উদ্‌যাপন অনুষ্ঠানে গ্রামের স্কুলগুলিতে ওই গ্রামের সর্বাধিক শিক্ষিত মহিলাদের দিয়ে জাতীয় পতাকা উত্তোলনের ঘটনা প্রধানমন্ত্রীর হৃদয় স্পর্শ করেছে৷ মোদির দাবি, 'এটা বেটি বাঁচাও বেটি পড়াও যোজনার সাফল্যের উদাহরণ।' মোদি বলেন, 'আগে শুধুমাত্র সরকারি দপ্তরে খাদি বস্ত্র ব্যবহার হত৷ কিন্তু, এখন বেকারত্ব দূরীকরণে খাদির গুরুত্ব অনস্বীকার্য৷ এখন নৌবাহিনী ও রেলওয়ের মতো বিভাগ খাদি বস্ত্রের ব্যবহারে জোর দেওয়ায় খাদি শিল্পের দুর্দশা অনেকটাই ঘুচেছে৷' মোদি চান দেশের সব ক'টি রেলওয়ে স্টেশনের দেওয়াল অঙ্কনের মাধ্যমে সুন্দর করে তোলা হোক। এই সৌন্দর্যায়ন চান তিনি হাসপাতাল, স্কুল, মন্দির, মসজিদ ও গির্জার দেওয়ালেও। প্রধানমন্ত্রী এদিন জানিয়েছেন, এবার থেকে যে–কোনও সময় মোবাইল ফোন থেকে ৮১৯০৮৮১৯০৮ নম্বরে মিসড কল দিলেই শোনা যাবে 'মন কি বাত' অনুষ্ঠান৷


রত্নাচল এক্সপ্রেসে আগুন, অশান্তির ভ্রুকুটিকে মাথায় নিয়েই ধীরে ধীরে স্বাভাবিক হচ্ছে অন্ধ্রপ্রদেশ

রত্নাচল এক্সপ্রেসে আগুন, অশান্তির ভ্রুকুটিকে মাথায় নিয়েই ধীরে ধীরে স্বাভাবিক হচ্ছে অন্ধ্রপ্রদেশ

24 ঘন্টা ওয়েব ডেস্ক: অশান্তির ভ্রুকুটিকে মাথায় নিয়েই ধীরে ধীরে স্বাভাবিক হচ্ছে অন্ধ্রপ্রদেশ। সংরক্ষণের দাবিতে কাপু সম্প্রদায়ের বিক্ষোভে গতকাল রণক্ষেত্রের চেহারা নেয় অন্ধ্রের তুনি শহর। কয়েকঘণ্টার মধ্যেই গোটা পূর্ব গোদাবরী জেলায় ছড়িয়ে পড়ে বিক্ষোভের আগুন। রত্নাচল এক্সপ্রেসে আগুন ধরিয়ে দেন বিক্ষোভকারীরা। বন্ধ করে দেওয়া হয় ১৬ নম্বর জাতীয় সড়ক। পুলিসের গাড়িতে আগুন ধরিয়ে দেওয়া হয়। আক্রান্ত হয় পুলিস থানাও। বিক্ষোভ মোকাবিলায় আহত হয় পনেরোজন পুলিসকর্মী। স্তব্ধ হয়ে যায় যোগাযোগ ব্যবস্থা। রবিবারই অন্ধ্রের মুখ্যমন্ত্রী চন্দ্রবাবু নায়ডু জানান, কাপু সম্প্রদায়কে সংরক্ষণের আওতায় আনতে প্রতিশ্রুতিবদ্ধ তাঁর সরকার। এরপর বিক্ষোভ উঠলেও, চরম হুঁশিয়ারি দিয়ে রেখেছেন আন্দোলনকারীরা। কাপু নেতা পদ্মনাভন জানিয়েছেন আজকের মধ্যে সরকার এ নিয়ে কোনও ঘোষণা না করলে আমরণ অনশনে বসবেন তিনি।


অন্ধ্রে  সংরক্ষণ এর জন্য আনন্দবাজার থেকে পাওয়া গল্প চিত্র

সংরক্ষণ নিয়ে বৈঠকে বসবেন মোদী-ভাগবত

আনন্দবাজার-৩১ আগস্ট, ২০১৫

কিন্তু একই সঙ্গে তাঁর বক্তব্য, যদি পটেলদের সংরক্ষণের আওতায় আনা না যায়, তা হলে পুরো সংরক্ষণ ব্যবস্থাটাই তুলে দেওয়া হোক। এরই পাশাপাশি হার্দিক আবার তাঁর সংরক্ষণের আন্দোলনে সামিল করতে চান জাঠ, গুজ্জর, এমনকী অন্ধ্রের রেড্ডিদেরও। আরএসএসের একটি অংশ মনে করছে, জাতি-ভিত্তিক সংরক্ষণ তুলে দেওয়ার এটাই উপযুক্ত সময়।

অন্ধ্রে  সংরক্ষণ এর জন্য আনন্দবাজার থেকে পাওয়া গল্প চিত্র

হার্দিক নেমেছেন ম্যারাথনে

আনন্দবাজার-৩০ আগস্ট, ২০১৫

আসলে এখন জাঠ আর গুজ্জরদের দলে টানতে চাইছেন হার্দিক। আর এই দুই সম্প্রদায়সংরক্ষণ ব্যবস্থা না তুলে উল্টে তার সুবিধা পাওয়ার পক্ষে। আর তাই যৌথ মঞ্চে বসে হার্দিককে আজ বলতে শোনা গিয়েছে, ''পটেল সম্প্রদায়ের জন্য সংরক্ষণই চাইছি আমরা। গুজরাতের পটেল, হরিয়ানা-মধ্যপ্রদেশ-রাজস্থান-উত্তরপ্রদেশের জাঠ-গুজ্জর সবই এক। বিহারের কুর্মি ও অন্ধ্রের ...

অন্ধ্রে  সংরক্ষণ এর জন্য এনটিভি থেকে পাওয়া গল্প চিত্র

'সিরিঞ্জ সাইকো' আতঙ্কে অন্ধ্রপ্রদেশের নারীরা

এনটিভি-১ সেপ্টেম্বর, ২০১৫

এক অদ্ভুত 'সিরিঞ্জ সাইকোর' আতঙ্কে অস্থির অন্ধ্রপ্রদেশের পশ্চিম গোদাবরি ও নরসাপুরম জেলার নারীরা। কালো কাপড়ে মুখ বেঁধে মোটরসাইকেলে করে ঘুরে বেড়ায় এই 'বিকৃতমনস্ক' লোকটি। একলা কোনো নারীকে পেলেই পেছন থেকে তাঁর শরীরে সিরিঞ্জ ফুটিয়ে চম্পট দেয়। অন্ধ্রের পুলিশের বরাতে এমনই জানিয়েছে হিন্দুস্তান টাইমস ...

অন্ধ্রে  সংরক্ষণ এর জন্য আনন্দবাজার থেকে পাওয়া গল্প চিত্র

বাংলাদেশে বিদ্যুৎ কেন্দ্র গড়বে রিলায়্যান্স পাওয়ার, আদানি গোষ্ঠী

আনন্দবাজার-৬ জুন, ২০১৫

টার্মিনালটিতে থাকবে গ্যাস সংরক্ষণ ও তরলকে ফের গ্যাসে রূপান্তরের ব্যবস্থা। বাংলাদেশের কক্সবাজার জেলার মহেশখালি দ্বীপে টার্মিনালটি গড়ে ওঠার কথা। ... মুকেশ অম্বানীর রিলায়্যান্স ইন্ডাস্ট্রিজেরই অন্ধ্রের ওই প্রকল্পে গ্যাস সরবরাহের কথা ছিল। কিন্তু কৃষ্ণা-গোদাবরী অববাহিকা বা কেজি বেসিনে উৎপাদন তলানিতে ...

স্বস্তির সময়ে 'বিশেষ আইন' কেন?

প্রথম আলো-১৭ জুন, ২০১৫

দেখা যাচ্ছে, বর্তমান দামেই ভারতের অন্ধ্রে তৈরি করা রিলায়েন্সের এলএনজি-নির্ভর বিদ্যুৎকেন্দ্রে উৎপাদন খরচ এত বেশি পড়ছে যে তা চালানো যাচ্ছে না। বাংলাদেশে এ ধরনের প্রকল্প পোষাবে কীভাবে? সাশ্রয়ী বিদ্যুৎ উৎপাদনের বিষয়টি মাথায় রেখেই মহাপরিকল্পনায় ৫০ ভাগ বিদ্যুতের উৎপাদন কয়লাভিত্তিক করার কথা বলা হয়েছে। আদানির সঙ্গে ...

হিন্দু হোন, নয় ভারত ছাড়ুন

প্রথম আলো-২৪ ডিসেম্বর, ২০১৪

গত আগস্ট মাসে নারী ও শিশুসহ ৩১ বাংলাদেশিকে অন্ধ্রের চিত্তর জেলার রেনিগুনতা রেলস্টেশন থেকে গ্রেপ্তার করা হয়। পুলিশের দাবি, পাসপোর্ট ছাড়া তারা ভ্রমণ করছিল। পাসপোর্ট না থাকার দায়ে উত্তর প্রদেশের মুজাফফরনগরের পুলিশও গত মঙ্গলবার কথিত চার বাংলাদেশি নারীর বিরুদ্ধে অভিযোগ গঠন করেছে। গত অক্টোবর মাস থেকে তারা ভারতে আছে বলে ...

অন্ধ্রে  সংরক্ষণ এর জন্য প্রথম আলো থেকে পাওয়া গল্প চিত্র

ছবি থেকে ফিঙ্গার প্রিন্ট নকল!

প্রথম আলো-১ জানুয়ারী, ২০১৫

অন্ধ্রের জলে মিশছে না তেলেঙ্গানার তেল · ধর্মঘটে ঢাকা-সিলেট রুটে বাস চলাচল বন্ধ · মানবতাবিরোধী অপরাধের দুই আসামিসহ আহত ৬ · ডিএসইতে লেনদেন বন্ধ · হিলারির ই-মেইলের অনুলিপি এফবিআইকে হস্তান্তর · সকল সর্বশেষ · সৌম্যর সঙ্গে প্রতিদ্বন্দ্বিতা নেই এনামুলের · বিদেশের মাটিতে ভারত আবার 'বিড়াল'ই · অ্যাশেজ জিতেও 'বাংলাদেশ-লজ্জা' ভুলতে পারছে ...

অন্ধ্রে  সংরক্ষণ এর জন্য প্রথম আলো থেকে পাওয়া গল্প চিত্র

আঘাত হেনেছে হুদহুদ

প্রথম আলো-১২ অক্টোবর, ২০১৪

হুদহুদের প্রভাবে ভারতের দক্ষিণ-পূর্বাঞ্চলীয় রাজ্য অন্ধ্রের উপকূলে ঘণ্টায় প্রায় ২০০ কিলোমিটার গতিতে বাতাস বইতে থাকে। প্রবল ঝড়-বৃষ্টিতে বিপর্যস্ত হয়ে পড়ে বিদ্যুৎ সরবরাহ। ঘূর্ণিঝড় উপদ্রুত বিভিন্ন এলাকায় সড়ক ও রেল যোগাযোগ বিচ্ছিন্ন হয়ে যায়। গুরুত্বপূর্ণ বন্দরনগর ২০ লাখ বাসিন্দার বিশাখাপট্টনাম ও আশপাশের এলাকায় জনজীবন ...

অন্ধ্রে  সংরক্ষণ এর জন্য প্রথম আলো থেকে পাওয়া গল্প চিত্র

হায়দরাবাদ থেকে তেলেঙ্গানা

প্রথম আলো-২৮ ফেব্রুয়ারী, ২০১৪

সীমানার কিছু পরিবর্তন হলেও ব্রিটিশরা এ সত্তা বহাল রাখে। ব্রিটিশ-ভারতের ৫৫৬টি দেশীয় রাজ্যের মধ্যে এটি ছিল সর্ববৃহৎ ও সবচেয়ে সমৃদ্ধ। মূল হায়দরাবাদ রাজ্যের আয়তন ছিল দুই লাখ ১৫ হাজার বর্গকিলোমিটার। কেটে নিয়ে অন্ধ্রের সঙ্গে যেটুকু দেওয়া হয়েছে, তার আয়তন এক লাখ ১৫ হাজার বর্গকিলোমিটার। আর বর্তমান লোকসংখ্যা সাড়ে তিন কোটি।


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