BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

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Saturday, September 24, 2011

Fwd: ऑपरेशन ग्रीन हंट और राजकीय दमन: सुनिए दयामनि बारला को



---------- Forwarded message ----------
From: reyaz-ul-haque <beingred@gmail.com>
Date: 2011/9/15
Subject: ऑपरेशन ग्रीन हंट और राजकीय दमन: सुनिए दयामनि बारला को
To: reyazul haque <tahreeq@gmail.com>


ऑपरेशन ग्रीन हंट के नाम से शुरू हुए अभियान को दो साल से अधिक का समय हो रहा है. इस दौरान छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखंड, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के साथ-साथ दूसरे कई राज्यों में अर्धसैनिक बलों और सेना की तैनाती की गई है. ये बल खनिज संपदा से समृद्ध इलाकों को टाटा, जिंदल, मित्तल, एस्सार, रिलायंस, वेदांता जैसी कारपोरेट कंपनियों के लिए दलितों-आदिवासियों के गांवों खाली कराने और जनता के प्रतिरोध आंदोलनों को कुचलने के मकसद से भेजे गए हैं. प्रतिरोध के लिए संगठित जनता के बीच से लोगों को फर्जी मुठभेड़ों में मारा जा रहा है, उनके गांव जलाए जा रहे हैं, उनकी महिलाओं का उत्पीड़न हो रहा है. देशी-विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की सेवा में जुटा भारत का शासक वर्ग खनिज और वन संपदा की खुली लूट के लिए अधिक से अधिक फौजी ताकत और काले कानूनों का सहारा ले रहा है. कारपोरेट मीडिया में इस युद्ध की कोई खबर आप तब तक नहीं पाएंगे, जब तक इसमें कारपोरेट कंपनियों की तरफ से लड़ रही भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों और हरमाद वाहिनी, सलवा जुडूम, कोबरा जैसे हत्यारे गिरोहों का कोई जवान नहीं मारा जाता. इसके बाद शुरू होता है टीवी चैनलों पर राष्ट्र, लोकतंत्र और विकास के नाम पर उन्मादी आह्वानों का दौर. लेकिन सदियों से सताए जा रहे मेहनत कशों की न तो पीड़ा वहां कभी जगह पाती है और न उनका संघर्ष.

कठोर दमन और शानदार संघर्षों के इस दौर में उन मेहनतकशों, दलितों, आदिवासियों की पीड़ा को और उनके संघर्षों को आवाज देने वाले लोगों और संगठनों को खामोश करने की लगातार कोशिश सत्ता द्वारा की जा रही है. जो लेखक, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता कारपोरेट लूट और राजकीय दमन के खिलाफ बोलते हैं, उन्हें गिरफ्तार कर जेलों में डाला जा रहा है. संगठनों पर पाबंदियां लगाई जा रही हैं. डॉ विनायक सेन, लेखक- संपादक सुधीर ढवले, पत्रकार सीमा आजाद, पत्रकार प्रशांत राही उनमें से कुछ उदाहरण भर है. इसी तरह पीयूसीएल, पीयूडीआर जैसे संगठनों पर निशाना साधने की भी कोशिश बार बार होती रही है.

सबसे हालिया उदाहरण जेएनयू में ग्रीन हंट के खिलाफ ढाई साल पहले बने एक फोरम 'जेएनयू फोरम अगेंस्ट वार ऑन पीपुल' की गतिविधियों पर प्रशासन द्वारा रोक लगाए जाने का है. 'विकास की अवधारणा और भारतीय लोकतंत्र की हकीकत' के विषय पर अप्रैल में हुए एक कार्यक्रम की सूचना देने के लिए बंटी एक पर्ची में छपे चित्र का बहाना बना कर इस संगठन की गतिविधि पर मई के तीसरे हफ्ते में रोक लगा दी गई. यह चित्र कई वर्षों से इंटरनेट पर मौजूद है और यह भारत में चल रहे राजकीय दमन और जनता के प्रतिरोध का कलात्मक चित्रण करता है. इस रोक को छात्रों ने मानने से इनकार किया. वे छुट्टियों के दिन थे, इसके बावजूद 1100 से अधिक छात्रों ने अपने जनवादी अधिकारों पर हुए इस हमले के खिलाफ हस्ताक्षर किया और इस रोक को हटाने की मांग की. इसके अलावा जेएनयू 40 से अधिक प्राध्यापकों और देश के सैकड़ों बुद्धिजीवियों ने भी इस रोक को हटाने की मांग की. लेकिन जेएनयू प्रशासन ने अब तक रोक नहीं हटाई है. खुद वीसी एसके सोपोरी का कहना है कि उन्हें छात्रों की लोकतांत्रिक गतिविधियों पर नजर और नियंत्रण रखने के निर्देश गृह मंत्रालय से मिले हैं.

फोरम को निशाना बनाने के निहितार्थ साफ हैं. फोरम पिछले ढाई सालों से ग्रीन हंट का विरोध करने के अपने मकसद पर मजबूती से खड़ा है. उसने लगातार शासक वर्ग के कारपोरेटपरस्त चरित्र को उजागर किया है और उसकी मुखालिफत की है. उसने हमेशा दमन का प्रतिरोध करते हुए और अपना जल, जंगल, जमीन बचाने के लिए लड़ रही जनता की हिमायत की है. पूरे देश में असहमति और प्रतिरोध की आवाजों को दबाने की प्रक्रिया के तहत ही फोरम पर भी प्रतिबंध लगाया गया है. लेकिन छात्रों के पूरे समर्थन से फोरम अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए है और उसने मई के बाद से कई कार्यक्रम किए हैं.

फोरम की गतिविधियों पर लगी रोक हटाने के संघर्ष के तहत फोरम ने कल शाम को जेएनयू में सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार दयामनि बारला को आमंत्रित किया. ऑपरेशन ग्रीन हंट और राजकीय दमन के मुद्दे पर बोलते हुए बारला ने झारखंड समेत देश भर के आदिवासी इलाकों में संसाधनों की कारपोरेट लूट और जनता के उत्पीड़न-दमन के ब्योरे पेश किए. आप भी सुनिए.

ऑपरेशन ग्रीन हंट और राजकीय दमन: सुनिए दयामनि बारला को





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Palash Biswas
Pl Read:
http://nandigramunited-banga.blogspot.com/

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