BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

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Wednesday, January 25, 2012

रूश्दी ‘खराब’, ‘निम्नस्तरीय’ लेखक : काटजू

रूश्दी 'खराब', 'निम्नस्तरीय' लेखक : काटजू

Wednesday, 25 January 2012 17:14

नयी दिल्ली, 25 जनवरी (एजेंसी) माक'डेय काटजू ने आज कहा कि सलमान रूश्दी 'खराब' और 'निम्नस्तरीय' लेखक हैं। विवादस्पद पुस्तक 'सैटेनिक वर्सेज' से पहले उन्हें बहुत अधिक लोग नहीं जानते थे। भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष और कुछ समय पहले तक उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश रहे काटजू ने भारत में जन्मे और ब्रिटेन में रहने वाले रूश्दी के प्रशंसकों की आलोचना की । काटजू ने कहा कि वे औपनिवेशिक हीनभावना से ग्रस्त है कि विदेश में रहने वाला लेखक महान होता है। 
भारतीय प्रेस परिषद :पीसीआई: के अध्यक्ष ने अपने बयान में कहा, ''मैंने रूश्दी की कुछ पुस्तकें पढ़ी हैं और मेरा मानना है कि वे एक खराब लेखक है और सैटेनिक वर्सेज से पहले उन्हें कम ही लोग जानते थे।'' 
उन्होंने कहा कि यहां तक 'मिडनाइट चिल्ड्रेन' को भी महान साहित्य कहना कठिन है।
काटजू ने कहा, '' समस्या यह है कि आज भारत के शिक्षित लोग औपनिवेशिक हीनभावना से ग्रस्त है। इसलिए जो भी लंदन या न्यूयार्क में रहता है, वह महान लेखक है। जबकि भारत में रहने वाले लेखक निम्न स्तर के है।

 

जयपुर साहित्य उत्सव के दौरान रूश्दी से संबंधित विवाद के विषय पर काटजू ने कहा, '' मैं धार्मिक रूढ़िवादिता का पक्षधर नहीं हूं । लेकिन मेरी इच्छा किसी निम्नस्तरीय लेखक को हीरो बनाने की नहीं है।''
जयपुर उत्सव का उल्लेख करते हुए काटजू ने कहा कि यहां लोगों को साहित्य पर गंभीर चर्चा की उम्मीद थी । उन्हें लगता था कि यहां कबीर, प्रेमचंद, शरद चंद्र, मंटो, गालिब, फैज, काजी नजरूल इस्लाम और सुब्रमण्यम भारती के साहित्य पर चर्चा होगी । 
उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश ने कहा, ''कबीर और तुलसीदास इसलिए अच्छे नहीं हैं क्योंकि वे बनारस के घाट पर रहते थे । जबकि रूश्दी महान लेखक इसलिए हैं क्योंकि वह टेम्स नदी के घाट पर रहते हैं। यह हमारे बौद्धिक और साहित्यिक लोगों का सोचने का स्तर है।'' 
काटजू ने कहा कि उत्सव में बाल्मीकि, व्यास से लेकर आधुनिक भारत के सभी साहित्यिक आयामों पर चर्चा की जानी चाहिए।

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